भारत ने शुरू किया एआई-संचालित स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम
भारत सरकार ने 18 जून 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एआई-संचालित स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम का शुभारंभ किया। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस पहल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभाणिया भी उपस्थित रहीं। यह नई व्यवस्था देश में खाद्यान्न भंडारण प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
स्मार्ट वेयरहाउसिंग क्या है?
स्मार्ट वेयरहाउसिंग एक डिजिटल भंडारण प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें आधुनिक तकनीकों, स्वचालन और डेटा विश्लेषण का उपयोग करके गोदामों की गतिविधियों की निगरानी की जाती है। भारत में यह प्रणाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत खाद्यान्न भंडारण से जुड़ी हुई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश के करोड़ों लोगों तक रियायती दरों पर खाद्यान्न पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्न के भंडारण, निगरानी और वितरण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि होगी।
स्मार्ट वेयरहाउसिंग में उपयोग की गई तकनीकें
इस अत्याधुनिक प्रणाली में कई उन्नत तकनीकों का समावेश किया गया है। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), स्वचालित निगरानी प्रणाली, फास्टैग आधारित गेट ऑटोमेशन, एएनपीआर आधारित वाहन पहचान, जियो-टैग्ड स्मार्ट लॉक, एआई आधारित बोरी गणना और गुणवत्ता निरीक्षण के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक शामिल हैं। वेयरहाउसों में स्थापित आईओटी सेंसर कार्बन डाइऑक्साइड और फॉस्फीन जैसी गैसों के स्तर की निगरानी करेंगे। इससे भंडारित खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने और संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करने में मदद मिलेगी।
प्रारंभिक क्रियान्वयन और विस्तार योजना
स्मार्ट वेयरहाउसिंग प्रणाली का प्रारंभिक चरण केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) द्वारा संचालित 215 से 216 गोदामों में लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अक्टूबर 2026 तक अपने लगभग 150 गोदामों में इसी प्रकार की स्मार्ट प्रणाली लागू करने की योजना बनाई है। इस परियोजना के अंतर्गत एक व्यापक डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है, जो वास्तविक समय में गोदामों की गतिविधियों की निगरानी करेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और त्वरित बनेगी।
खाद्यान्न प्रबंधन में संभावित लाभ
नई प्रणाली खाद्यान्न भंडारण और प्रबंधन में कई महत्वपूर्ण सुधार लाने की क्षमता रखती है। इससे गोदामों में रखे गए खाद्यान्न की डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी तथा संचालन संबंधी सभी गतिविधियों पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा यह प्रणाली अनुपालन निगरानी, कर्मचारियों की उत्पादकता का मूल्यांकन, संभावित खतरों की शीघ्र पहचान और वाहनों के आवागमन में लगने वाले समय को कम करने में भी सहायता करेगी। परिणामस्वरूप खाद्यान्न प्रबंधन अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और लागत प्रभावी बन सकेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) भारत सरकार के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र की वेयरहाउसिंग संस्था है।
- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की स्थापना वर्ष 1965 में खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत की गई थी।
- फास्टैग तकनीक आरएफआईडी आधारित इलेक्ट्रॉनिक पहचान प्रणाली है, जिसका उपयोग टोल और गेट प्रबंधन में किया जाता है।
- एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक वाहनों की पहचान और निगरानी के लिए उपयोग की जाती है।
एआई-संचालित स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम भारत के खाद्यान्न भंडारण क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह प्रणाली खाद्यान्न सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन दक्षता को मजबूत करेगी। भविष्य में इसके व्यापक विस्तार से देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा नेटवर्क को और अधिक सशक्त बनाने में सहायता मिलेगी।