बीमा क्षेत्र में एआई के लिए IRDAI ने गठित किया सात सदस्यीय कार्य समूह

बीमा क्षेत्र में एआई के लिए IRDAI ने गठित किया सात सदस्यीय कार्य समूह

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 18 जून 2026 को बीमा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को विनियमित और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एक सात सदस्यीय कार्य समूह का गठन किया है। इस समूह को एआई आधारित बीमा सेवाओं के लिए शासन ढांचा, सर्वोत्तम प्रथाएं, सुरक्षा उपाय तथा एआई ऑडिट फ्रेमवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बीमा उद्योग में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ जुड़े जोखिमों तथा नियामकीय आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कार्य समूह की संरचना

इस कार्य समूह की अध्यक्षता हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) के निदेशक प्रोफेसर संदीप के. शुक्ला कर रहे हैं। IRDAI के महाप्रबंधक और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी दीपक गायकवाड़ को सदस्य-संयोजक नियुक्त किया गया है। समूह में भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In), रिजर्व बैंक इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (ReBIT), एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस तथा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। यह विविध विशेषज्ञता एआई से जुड़े तकनीकी, सुरक्षा और व्यावसायिक पहलुओं पर व्यापक अध्ययन सुनिश्चित करेगी।

कार्य समूह का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

कार्य समूह बीमा कंपनियों, पॉलिसीधारकों और पूरे बीमा पारिस्थितिकी तंत्र पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव का अध्ययन करेगा। इसके अंतर्गत एआई आधारित प्रणालियों से जुड़े जोखिमों, शासन संबंधी आवश्यकताओं, नैतिक उपयोग, पारदर्शिता, निर्णयों की व्याख्यात्मकता और डेटा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा समूह बीमा दावों के निपटान, धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग का भी मूल्यांकन करेगा। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई तकनीक का उपयोग ग्राहकों के हितों और नियामकीय मानकों के अनुरूप हो।

वैश्विक नियामकीय मॉडल का अध्ययन

IRDAI ने कार्य समूह को विश्व स्तर पर अपनाए जा रहे एआई नियामकीय और पर्यवेक्षी मॉडलों का अध्ययन करने का भी दायित्व सौंपा है। समूह यह सुझाव देगा कि बीमा कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले एआई उपकरणों के लिए तैनाती से पहले और तैनाती के बाद किस प्रकार के ऑडिट और अनुपालन मानक लागू किए जाने चाहिए। प्राधिकरण ने इस कार्य समूह को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में बीमा क्षेत्र के लिए एआई संबंधी नीतियां और दिशानिर्देश विकसित किए जा सकते हैं।

साइबर सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर जोर

एआई के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसी संदर्भ में IRDAI ने अप्रैल 2026 में विनियमित संस्थाओं के लिए सूचना और साइबर सुरक्षा संबंधी संशोधित दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों में एआई-संचालित साइबर खतरों सहित बदलते सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख किया गया है। नई कार्य समूह पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बीमा क्षेत्र में एआई का उपयोग सुरक्षित, पारदर्शी और उत्तरदायी तरीके से किया जाए तथा संभावित साइबर जोखिमों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • IRDAI की स्थापना बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के तहत की गई थी।
  • CERT-In भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रतिक्रिया एजेंसी है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
  • ReBIT का पूर्ण रूप रिजर्व बैंक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड है।
  • बीमा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग दावों के निपटान, धोखाधड़ी की पहचान, अंडरराइटिंग और ग्राहक सेवा में किया जाता है।

बीमा उद्योग में एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए IRDAI द्वारा गठित यह कार्य समूह अत्यंत महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे एआई के सुरक्षित, नैतिक और पारदर्शी उपयोग के लिए स्पष्ट मानक विकसित होंगे, जो बीमा कंपनियों, ग्राहकों और पूरे वित्तीय तंत्र के हितों की रक्षा करने में सहायक सिद्ध होंगे।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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