एसबीआई ने केंद्र सरकार को सौंपा ₹8,813 करोड़ का लाभांश

एसबीआई ने केंद्र सरकार को सौंपा ₹8,813 करोड़ का लाभांश

भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹8,813 करोड़ का लाभांश प्रदान किया है। 8 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में एसबीआई के अध्यक्ष सी.एस. सेठी ने यह लाभांश चेक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा। यह भुगतान बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और सरकार के लिए गैर-कर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में एसबीआई की भूमिका को दर्शाता है।

लाभांश क्या होता है और सरकार को इसका लाभ कैसे मिलता है?

लाभांश किसी कंपनी द्वारा अपने मुनाफे का वह हिस्सा होता है जो उसके शेयरधारकों को वितरित किया जाता है। चूंकि भारत सरकार एसबीआई में लगभग 55 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है, इसलिए बैंक द्वारा घोषित लाभांश का बड़ा भाग सरकार को प्राप्त होता है। एसबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए ₹17.35 प्रति इक्विटी शेयर का लाभांश घोषित किया था। इस लाभांश का भुगतान 4 जून 2026 को निर्धारित किया गया था। सरकार की बड़ी हिस्सेदारी के कारण उसे कुल ₹8,813 करोड़ की राशि प्राप्त हुई।

वित्त वर्ष 2025-26 में एसबीआई का शानदार प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2025-26 एसबीआई के लिए अत्यंत सफल रहा। बैंक ने ₹80,032 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 12.88 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में बैंक का परिचालन लाभ भी 11.25 प्रतिशत बढ़कर ₹1,23,015 करोड़ तक पहुंच गया। बेहतर वित्तीय प्रदर्शन का प्रभाव लाभांश भुगतान पर भी दिखाई दिया। वित्त वर्ष 2024-25 में एसबीआई ने केंद्र सरकार को ₹8,076.84 करोड़ का लाभांश दिया था, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर ₹8,813 करोड़ हो गई।

केंद्र सरकार के राजस्व में योगदान

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों से मिलने वाला लाभांश केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। गैर-कर राजस्व में लाभांश, ब्याज प्राप्तियां, शुल्क और विभिन्न सेवाओं से प्राप्त आय शामिल होती है। एसबीआई जैसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक नियमित रूप से लाभांश का भुगतान करते हैं, जिससे सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलती है। इसलिए ऐसे भुगतान केंद्रीय बजट और सरकारी वित्तीय प्रबंधन के दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखते हैं।

भारत के सार्वजनिक क्षेत्रीय बैंकिंग तंत्र में एसबीआई की भूमिका

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वे बैंक होते हैं जिनमें भारत सरकार की बहुसंख्यक हिस्सेदारी होती है। एसबीआई देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, जो परिसंपत्तियों, जमा राशि और शाखा नेटवर्क के मामले में अग्रणी स्थान रखता है। वर्ष 1955 में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया के राष्ट्रीयकरण के बाद एसबीआई की स्थापना हुई थी। तब से यह भारत की बैंकिंग प्रणाली का प्रमुख स्तंभ बना हुआ है और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना वर्ष 1955 में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया के राष्ट्रीयकरण के बाद हुई थी।
  • भारत सरकार एसबीआई में लगभग 55 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एसबीआई ने ₹17.35 प्रति इक्विटी शेयर का लाभांश घोषित किया।
  • केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व में लाभांश, ब्याज प्राप्तियां, शुल्क और उपयोगकर्ता शुल्क शामिल होते हैं।

एसबीआई द्वारा केंद्र सरकार को ₹8,813 करोड़ का लाभांश भुगतान बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति और लाभप्रदता का प्रमाण है। यह राशि न केवल सरकार के गैर-कर राजस्व को बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आर्थिक महत्वता को भी रेखांकित करती है। एसबीआई का निरंतर बेहतर प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती और स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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