जेब में स्मार्टफोन और हाथ में कानून: FSSAI का नया दांव मिलावटी खाना बेचने वालों की कैसे बढ़ाएगा मुसीबत?
सड़े हुए अंडे, एक्सपायर्ड दूध, कीड़े मकोड़ों से रेंगती हुई रेस्टोरेंट की रसोई और ऑनलाइन ऑर्डर करने पर आने वाला बासी खाना। यह सब कुछ ऐसी चीजें हैं जिनसे देश का हर दूसरा नागरिक कभी न कभी परेशान जरूर हुआ है। ज्यादातर लोग ऐसी घटनाओं को देखकर या तो रेस्टोरेंट वाले से थोड़ा बहस करते हैं या फिर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर अपनी भड़ास निकाल लेते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होता था, क्योंकि आम जनता के पास इन लापरवाह फूड बिजनेस ऑपरेटरों पर सीधी कार्रवाई करने का कोई आसान जरिया नहीं था। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए भारत की सबसे बड़ी खाद्य नियामक संस्था, FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। FSSAI ने एक राष्ट्रव्यापी सिटीजन रिपोर्टिंग पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत देश का हर नागरिक अब सीधे फूड इंस्पेक्टर की भूमिका निभा सकता है। सरकार ने इसके लिए “बी द आइज ऑफ फूड सेफ्टी” (खाद्य सुरक्षा की आंखें बनें) नाम से एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जो देश के हर नागरिक को यह ताकत देता है कि वे खराब या मिलावटी भोजन बेचने वालों की सीधी शिकायत दर्ज करा सकें और उन पर कानूनी शिकंजा कसवा सकें।
कैसे काम करता है FSSAI का यह नया डिजिटल हथियार?
अब तक किसी भी फूड आउटलेट की शिकायत करने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे या लंबी चौड़ी कागजी कार्रवाई करनी होती थी। लेकिन FSSAI ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर बेहद आसान कर दिया है। इसके लिए ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ (Food Safety Connect) नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन और एक वेब पोर्टल लॉन्च किया गया है, जो ‘फूड सेफ्टी कम्प्लायंस सिस्टम’ (FoSCoS) का एक हिस्सा है। अगर आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां आपको गंदगी दिखती है, या ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप से मंगाए गए सामान में एक्सपायर्ड डेट मिलती है, तो आपको बस अपने स्मार्टफोन से एक काम करना है।

फोटो खींचिए और अपलोड कीजिए
इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत है विजुअल प्रूफ। शिकायतकर्ता को केवल उस दूषित भोजन, गंदी रसोई या एक्सपायर्ड पैकेट की एक साफ तस्वीर खींचनी होगी।

विवरण दर्ज करें
फोटो के साथ आपको दुकान या रेस्टोरेंट का नाम, लोकेशन और अपनी शिकायत की छोटी सी डिटेल ऐप पर डालनी होगी।
सीधे एक्शन की शुरुआत
जैसे ही आप फोटो के साथ अपनी शिकायत दर्ज करते हैं, FSSAI की ग्राउंड टीम और स्थानीय फूड सेफ्टी अथॉरिटी के पास एक अलर्ट चला जाता है। एक सिंगल फोटो के आधार पर ही विभाग तुरंत उस आउटलेट पर छापा मार सकता है।
क्विक-कॉमर्स और बड़े ब्रांड्स पर FSSAI का हंटर
यह नई पहल केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर इसके बड़े असर दिखने शुरू हो चुके हैं। हाल ही में इस सिटीजन रिपोर्टिंग मैकेनिज्म की ताकत तब देखने को मिली जब देश के एक बहुत बड़े क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘स्विगी इंस्टामार्ट’ को FSSAI की तरफ से एक साथ 9 कड़े नोटिस जारी किए गए। आम उपभोक्ताओं ने इस नए ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें इस प्लेटफॉर्म के जरिए सड़े हुए अंडे, एक्सपायर्ड व्हे प्रोटीन, खराब हो चुका दूध और डैमेज पैकेज्ड फूड डिलीवर किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, कुछ ग्राहकों ने यह भी उजागर किया कि ऐप पर कई वेंडर्स फर्जी या अमान्य FSSAI लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। इस जन-शिकायत का असर यह हुआ कि FSSAI ने कंपनी से तुरंत विस्तृत स्पष्टीकरण और सुधारात्मक कदमों की रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा लखनऊ में एक नामी मसाला बनाने वाली फैक्ट्री को भी नागरिकों की शिकायत के बाद सील कर दिया गया, जहां भारी मात्रा में मिलावटी कच्चा माल जब्त किया गया। यह कार्रवाइयां साफ दर्शाती हैं कि अब आम आदमी की एक शिकायत बड़े से बड़े ब्रांड की रातों की नींद उड़ा सकती है।
ग्राहक के रूप में आपकी क्या हैं शक्तियां?
अक्सर लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने किसी रेस्टोरेंट या ऐप से खराब खाना मंगाया है, तो केवल पैसे वापस (रिफंड) मिल जाना ही काफी है। लेकिन FSSAI के नियमों के मुताबिक, खराब खाना बेचना एक दंडनीय अपराध है और केवल रिफंड दे देना किसी कंपनी की जिम्मेदारी को खत्म नहीं करता। इस नए इकोसिस्टम के तहत ग्राहकों को कई विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिन्हें जानना बेहद जरूरी है।
| ग्राहक का अधिकार | इसका व्यावहारिक मतलब |
| सीधी जवाबदेही | हर रजिस्टर्ड फूड बिजनेस को अपनी शिकायतें निपटाने के लिए एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करना अनिवार्य है। |
| स्टेट लेवल एस्केलेशन | अगर नोडल ऑफिसर आपकी शिकायत पर सही कार्रवाई नहीं करता, तो मामला सीधे राज्य के फूड सेफ्टी कमिश्नर के पास ट्रांसफर हो जाता है। |
| लाइसेंस वेरिफिकेशन | कोई भी नागरिक फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप के जरिए किसी भी रेस्टोरेंट या दुकान के FSSAI लाइसेंस की सत्यता को तुरंत ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है। |
मिलावट और फूड सेफ्टी से जुड़े कुछ हैरान करने वाले तथ्य
एडल्ट्रेशन का इतिहास
खाने में मिलावट का खेल कोई नया नहीं है। प्राचीन रोम के समय में भी लोग वाइन को मीठा बनाने के लिए उसमें खतरनाक लेड (शीशा) मिला दिया करते थे, जिसकी वजह से कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाते थे।
दुनिया का सबसे ज्यादा मिलावट वाला खाना
वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दूध, शहद, ऑलिव ऑयल और केसर दुनिया के चार ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें सबसे ज्यादा बड़े पैमाने पर मिलावट की जाती है।
बैक्टीरिया की रफ्तार
अगर पके हुए खाने को 2 घंटे से ज्यादा समय तक कमरे के सामान्य तापमान (डेंजर जोन) पर छोड़ दिया जाए, तो उसमें फूड पॉइजनिंग फैलाने वाले बैक्टीरिया की संख्या हर 20 मिनट में दोगुनी हो जाती है।
एक्सपायरी डेट का सच
बहुत सी डिब्बाबंद चीजों पर लिखी ‘बेस्ट बिफोर’ डेट का मतलब यह नहीं होता कि उस तारीख के बाद खाना जहरीला हो जाएगा। इसका मतलब केवल यह होता है कि उस तारीख के बाद भोजन का स्वाद, रंग और उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कम होने लगेगी। हालांकि, ‘यूज़ बाय’ (Use By) डेट के बाद खाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। FSSAI का यह नया कदम भारत के फूड सेक्टर में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। अब तक संसाधन और स्टाफ की कमी का रोना रोने वाला फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट अब देश के करोड़ों नागरिकों की ‘डिजिटल आंखों’ के जरिए हर उस कोने पर नजर रख सकेगा, जहां लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगली बार जब भी आपकी थाली में कोई मिलावटी या गंदा खाना आए, तो उसे चुपचाप फेंकने के बजाय अपने फोन का कैमरा उठाइए, क्योंकि आपकी एक फोटो किसी बड़े खतरे को टाल सकती है।