भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अहम वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करने जा रहे हैं। इस बैठक का उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है। राष्ट्रपति ली की यह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है और इसे दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत आर्थिक सहयोग और लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
रणनीतिक क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच होने वाली चर्चा में शिपबिल्डिंग, व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा और अन्य उभरती तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दोनों देश मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience) और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के इच्छुक हैं, इसलिए शिपबिल्डिंग और सेमीकंडक्टर साझेदारी को विशेष प्राथमिकता मिलने की संभावना है। दक्षिण कोरिया उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) में वैश्विक अग्रणी है, जबकि भारत तेजी से औद्योगिक आधार को मजबूत कर रहा है। यह साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनती है।
व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार
भारत और दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए भी ठोस कदम उठा सकते हैं। दोनों पक्ष 2010 से लागू व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को और अधिक उन्नत बनाने पर भी चर्चा करेंगे।
दक्षिण कोरिया की कंपनियां जैसे सैमसंग, हुंडई, एलजी और किया पहले से ही भारत में बड़े निवेश कर चुकी हैं, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और भारी उद्योगों में। नई वार्ता से इन क्षेत्रों में और अधिक निवेश तथा औद्योगिक सहयोग की संभावना बढ़ेगी।
सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों को मजबूती
आर्थिक सहयोग के साथ-साथ दोनों नेता सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा करेंगे। साझा बौद्ध विरासत, शैक्षणिक सहयोग, पर्यटन और बढ़ती अकादमिक साझेदारियां दोनों देशों के बीच सद्भाव को मजबूत कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति ली के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन भी करेंगे, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गर्मजोशी और इस यात्रा के महत्व को दर्शाता है। सांस्कृतिक संबंधों का यह विस्तार रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बनाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत और दक्षिण कोरिया ने 2015 में अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का दर्जा दिया था।
- भारत-दक्षिण कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) वर्ष 2010 में लागू हुआ था।
- दक्षिण कोरिया ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारत के प्रमुख निवेशकों में शामिल है।
- राष्ट्रपति ली जे म्युंग की यह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के रूप में भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति ली जे म्युंग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति ली से मुलाकात कर बहु-क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता का स्वागत किया। इसके अलावा, दोनों नेता इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा करेंगे। यह यात्रा तेजी से बदलते भू-राजनीतिक वातावरण में भारत-दक्षिण कोरिया सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।