भारत-दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक संबंध मजबूत, 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल 2026 को भारत और दक्षिण कोरिया के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें भारत में कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप की स्थापना और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य प्रमुख हैं। यह घोषणा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई।
दोनों नेताओं ने इस साझेदारी को केवल एक भरोसेमंद संबंध नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बढ़ता कदम बताया। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, उन्नत विनिर्माण और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में हैं।
कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप से बढ़ेगा निवेश
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत में विशेष कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे, ताकि दक्षिण कोरियाई कंपनियों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs), को भारत में निवेश और संचालन में आसानी हो।
इन टाउनशिप का उद्देश्य बेहतर बुनियादी ढांचा, तेज प्रशासनिक सहायता और विनिर्माण सहयोग को बढ़ावा देना है। सैमसंग, हुंडई, एलजी और किया जैसी दक्षिण कोरियाई कंपनियां पहले से ही भारत में मजबूत उपस्थिति रखती हैं। नई औद्योगिक टाउनशिप से उन्नत विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादन में और अधिक निवेश आने की उम्मीद है।
2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
वर्तमान में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27 अरब अमेरिकी डॉलर का है। दोनों देशों ने इसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों ने मौजूदा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को एक वर्ष के भीतर अपग्रेड करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, शिपबिल्डिंग, स्टील, हरित ऊर्जा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
नए आर्थिक मंच और वित्तीय सहयोग
इस साझेदारी को मजबूत करने के लिए कई नई व्यवस्थाओं की भी घोषणा की गई। इनमें भारत-कोरिया वित्तीय मंच (India-Korea Financial Forum), औद्योगिक सहयोग समिति (Industrial Cooperation Committee) और आर्थिक सुरक्षा संवाद (Economic Security Dialogue) शामिल हैं।
इनका उद्देश्य वित्तीय प्रवाह को बेहतर बनाना, व्यापारिक सहभागिता को मजबूत करना और महत्वपूर्ण तकनीकों व आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही MSMEs के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का भी आदान-प्रदान किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत और दक्षिण कोरिया ने 2015 में अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) का दर्जा दिया था।
- भारत-दक्षिण कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) वर्ष 2010 में लागू हुआ था।
- दक्षिण कोरिया शिपबिल्डिंग, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण में वैश्विक अग्रणी देश है।
- सैमसंग, हुंडई, एलजी, किया और POSCO भारत में कार्यरत प्रमुख दक्षिण कोरियाई कंपनियां हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों पर भी जोर दिया। उन्होंने ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ भारत में के-पॉप, कोरियाई फिल्मों, एनीमेशन, गेमिंग और मनोरंजन की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया। राष्ट्रपति ली जे म्युंग की यह यात्रा, जो आठ वर्षों से अधिक समय बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्राध्यक्ष की भारत यात्रा है, आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।