डेसमंड मॉरिस का निधन, ‘द नेकेड एप’ से मानव व्यवहार को नई दृष्टि देने वाले वैज्ञानिक नहीं रहे

डेसमंड मॉरिस का निधन, ‘द नेकेड एप’ से मानव व्यवहार को नई दृष्टि देने वाले वैज्ञानिक नहीं रहे

प्रसिद्ध ब्रिटिश प्राणी विज्ञानी, लेखक, टेलीविजन प्रस्तोता और अतियथार्थवादी चित्रकार डेसमंड मॉरिस का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके पुत्र जेसन मॉरिस ने 20 अप्रैल 2026 को उनके निधन की पुष्टि करते हुए उन्हें असीम जिज्ञासा और रचनात्मकता से भरा व्यक्ति बताया। डेसमंड मॉरिस को विशेष रूप से उनकी 1967 की चर्चित पुस्तक The Naked Ape के लिए जाना जाता है, जिसने मानव व्यवहार को देखने का तरीका बदल दिया।

उन्होंने मनुष्य को प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि पशु जगत का ही एक हिस्सा मानते हुए मानव आदतों, सामाजिक व्यवहार और जैविक प्रवृत्तियों को वैज्ञानिक दृष्टि से समझाने का प्रयास किया। उनकी सोच ने लोकप्रिय विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह पुस्तक जिसने सोच बदल दी

1967 में प्रकाशित The Naked Ape ने विश्वभर में बड़ी चर्चा पैदा की। यह पुस्तक कुछ ही सप्ताहों में लिखी गई थी, लेकिन इसका प्रभाव दशकों तक बना रहा। इसमें डेसमंड मॉरिस ने मानव आदतों, यौन व्यवहार, आक्रामकता और सामाजिक संबंधों को प्राणी विज्ञान और विकासवाद के दृष्टिकोण से समझाया।

उनका तर्क था कि आधुनिक सभ्यता और तकनीकी प्रगति के बावजूद मनुष्य जैविक रूप से अब भी एक “नग्न वानर” यानी बंदर जैसे व्यवहार वाला प्राणी है। यह पुस्तक लगभग 2 करोड़ प्रतियां बेचने में सफल रही और अपने समय की सबसे चर्चित विज्ञान पुस्तकों में शामिल हुई।

वैज्ञानिक करियर और चिड़ियाघर अनुसंधान

डेसमंड मॉरिस का जन्म 24 जनवरी 1928 को इंग्लैंड के स्विंडन के पास पर्टन में हुआ था। उन्होंने बर्मिंघम विश्वविद्यालय से प्राणी विज्ञान की पढ़ाई की और बाद में पशु व्यवहार पर शोध करते हुए डॉक्टरेट पूरी की।

उनका मुख्य ध्यान एथोलॉजी पर था, जो प्राकृतिक परिस्थितियों में पशुओं के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है। लंदन चिड़ियाघर में उन्होंने स्तनधारी प्राणियों के क्यूरेटर के रूप में कार्य किया और विशाल पांडा के प्रजनन जैसे विशेष परियोजनाओं में भी भाग लिया। पशुओं के साथ उनके गहरे अवलोकन ने बाद में मानव स्वभाव पर उनकी लेखनी को प्रभावित किया।

टेलीविजन और कला की दुनिया में योगदान

डेसमंड मॉरिस केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि लोकप्रिय टेलीविजन चेहरा भी थे। Zoo Time, The Human Animal और Animal Country जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने जटिल वैज्ञानिक विचारों को सरल भाषा में आम दर्शकों तक पहुंचाया।

विज्ञान के साथ-साथ वे एक सम्मानित अतियथार्थवादी चित्रकार भी थे। उन्होंने जोन मिरो जैसे प्रसिद्ध कलाकारों के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लिया। उन्होंने यह जानने का भी प्रयास किया कि क्या रचनात्मकता केवल मनुष्यों में होती है, जिसके लिए उन्होंने चिंपैंजी को पेंटब्रश देकर चित्र बनवाने का प्रयोग भी किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डेसमंड मॉरिस 1967 की प्रसिद्ध पुस्तक The Naked Ape के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं।
  • एथोलॉजी का अर्थ है प्राकृतिक परिस्थितियों में पशु व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन।
  • वे लंदन चिड़ियाघर में स्तनधारी प्राणियों के क्यूरेटर रह चुके थे।
  • उन्होंने मानव शारीरिक भाषा, सामाजिक व्यवहार और अनुष्ठानों को विकासवादी जीवविज्ञान से जोड़ा।

हालांकि उनके कुछ विचारों, विशेषकर लैंगिक भूमिकाओं और मानव यौन व्यवहार पर, वैज्ञानिकों ने आलोचना भी की, फिर भी डेसमंड मॉरिस 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली लोकप्रिय विज्ञान लेखकों में गिने जाते हैं। The Human Zoo और Intimate Behaviour जैसी पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने आधुनिक जीवन को जैविक प्रवृत्तियों से जोड़कर समझाने का प्रयास जारी रखा। उनका सबसे बड़ा योगदान यही रहा कि उन्होंने लाखों लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि मनुष्य प्रकृति से ऊपर नहीं, बल्कि उसी का एक हिस्सा है।

Originally written on April 22, 2026 and last modified on April 22, 2026.

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