भारत के सरकारी स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में तेज़ सुधार, डिजिटल शिक्षा को मिली नई गति

भारत के सरकारी स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में तेज़ सुधार, डिजिटल शिक्षा को मिली नई गति

भारत में सरकारी स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा 2023-24 के 46.2 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 63.1 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड) और निजी स्कूलों के बीच इंटरनेट उपलब्धता का अंतर भी 28 प्रतिशत अंक से घटकर 16 प्रतिशत अंक रह गया है। यह बदलाव देश में डिजिटल शिक्षा को मजबूत बनाने और छात्रों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यूडीआईएसई+ रिपोर्ट में क्या सामने आया?

यूडीआईएसई+ (Unified District Information System for Education Plus) भारत सरकार का राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा डेटाबेस है, जिसमें स्कूलों के बुनियादी ढांचे, नामांकन, शिक्षकों और विभिन्न सुविधाओं से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 67.4 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 53.9 प्रतिशत था। रिपोर्ट बताती है कि इंटरनेट अब केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन मूल्यांकन और प्रशासनिक कार्यों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।

राज्यों का प्रदर्शन और डिजिटल शिक्षा का महत्व

स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में गोवा ने 100 प्रतिशत कवरेज के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि आंध्र प्रदेश 99.2 प्रतिशत इंटरनेट सुविधा के साथ दूसरे स्थान पर है। इंटरनेट की उपलब्धता से विद्यार्थियों को ई-लर्निंग सामग्री, ऑनलाइन कक्षाओं, डिजिटल पुस्तकालयों और विभिन्न शैक्षिक प्लेटफॉर्म तक आसान पहुंच मिलती है। इसके अलावा, स्कूल प्रशासन के लिए भी डेटा प्रबंधन और ऑनलाइन सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी हो जाता है।

डिजिटल विभाजन और महिलाओं की इंटरनेट पहुंच

डिजिटल विभाजन (Digital Divide) का अर्थ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच डिजिटल उपकरणों, इंटरनेट और तकनीकी कौशल तक असमान पहुंच से है। यूनेस्को की वर्ष 2024 की रिपोर्ट Technology on Her Terms के अनुसार, दुनिया में पुरुषों की तुलना में लगभग 24.4 करोड़ (244 मिलियन) कम महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं। महिलाओं के लिए इंटरनेट की उपलब्धता शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन जैसे अनेक क्षेत्रों में अवसरों का विस्तार करती है। इसलिए डिजिटल समावेशन कार्यक्रमों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीक के व्यावहारिक उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूडीआईएसई+ (UDISE+) का पूरा नाम यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस है।
  • वर्ष 2025-26 के यूडीआईएसई+ आंकड़ों के अनुसार, गोवा के सभी स्कूलों में 100 प्रतिशत इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है।
  • यूनेस्को की वर्ष 2024 की जेंडर रिपोर्ट का शीर्षक Technology on Her Terms है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पुरुषों की तुलना में लगभग 24.4 करोड़ कम महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं।

भारत के सरकारी स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में हुई यह वृद्धि डिजिटल शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के लिए भी तकनीक आधारित कार्य प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी। साथ ही, महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए डिजिटल समावेशन कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर शिक्षा और सामाजिक विकास के नए अवसर भी सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

Originally written on July 13, 2026 and last modified on July 13, 2026.

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