भारत की स्किलिंग व्यवस्था में बड़ी खामियां उजागर
नीति आयोग की स्किल डेवलपमेंट, लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट डिविजन की नई रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने भारत की कौशल व्यवस्था, युवाओं की रोजगार-योग्यता और नौकरी बाजार से जुड़ाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में बड़ी संख्या में युवा न तो पढ़ाई में हैं, न रोजगार में और न ही प्रशिक्षण में, जबकि कॉलेज डिग्रीधारियों का बड़ा हिस्सा अपनी योग्यता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहा है।
युवाओं की रोजगार-योग्यता पर चिंता
रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 8.7 करोड़ युवाओं को NEET श्रेणी में रखा गया है। NEET का अर्थ है Not in Education, Employment, or Training, यानी जो न शिक्षा में हैं, न नौकरी में और न प्रशिक्षण में। यह अनुमान राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 78वें दौर के 2021 के आंकड़ों पर आधारित है।
रिपोर्ट का एक और अहम निष्कर्ष यह है कि भारत में केवल 8.25% कॉलेज स्नातक ही अपनी योग्यता से मेल खाने वाली भूमिकाओं में काम कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि डिग्री और रोजगार के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
स्किलिंग फाइनेंस और कार्यक्रमों की दिशा
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2014-15 के बाद से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया है। इसके बावजूद कौशल कार्यक्रमों के परिणामों को लेकर सवाल बने हुए हैं। इसी संदर्भ में रिपोर्ट ने वित्तपोषण के तरीके में बदलाव की सिफारिश की है।
रिपोर्ट का कहना है कि केवल नामांकन या दाखिले के आधार पर फंडिंग देने के बजाय आउटकम-लिंक्ड फाइनेंसिंग अपनाई जानी चाहिए। इसका मतलब है कि धनराशि का संबंध वास्तविक परिणामों से हो, जैसे नौकरी में नियुक्ति, वेतन में बढ़ोतरी और लंबे समय तक रोजगार में बने रहना। रिपोर्ट ने उद्योग-समर्थित फाइनेंसिंग मॉडल को भी उपयोगी बताया है।
केंद्र सरकार के FY 2025-26 के बजट में कौशल विकास से जुड़ा व्यय ₹34,000 करोड़ बताया गया है।
स्कूल स्तर से कौशल शिक्षा की जरूरत
रिपोर्ट ने कौशल शिक्षा को स्कूल स्तर से जोड़ने पर जोर दिया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि ग्रेड 6 से ही General Employability and Entrepreneurship Skills (GEES) शुरू किए जाएं। साथ ही ग्रेड 9 से Kaushal Tracks के रूप में संरचित व्यावसायिक मार्ग उपलब्ध कराए जाएं।
रिपोर्ट का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही रोजगार-उन्मुख और उद्यमिता-आधारित कौशल मिलें, तो आगे चलकर शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम की जा सकती है।
महिला श्रम भागीदारी पर भी सवाल
रिपोर्ट में महिला रोजगार की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया है। इसके अनुसार केवल 3% भारतीय महिलाएं औपचारिक नौकरियों में हैं, जबकि 71% महिलाएं अनौपचारिक काम या NEET श्रेणी में आती हैं। यह आंकड़ा बताता है कि स्किलिंग और रोजगार नीतियों में लैंगिक भागीदारी को अधिक गंभीरता से शामिल करने की जरूरत है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NEET का पूरा अर्थ है: Not in Education, Employment, or Training।
- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण भारत में बड़े पैमाने पर घरेलू सर्वेक्षणों की प्रमुख प्रणाली है।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में शामिल है।
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) भारत की संवैधानिक ऑडिट संस्था है।
कुल मिलाकर, नीति आयोग की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत को केवल प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाने से आगे बढ़कर गुणवत्ता, रोजगार-परिणाम और शिक्षा-रोजगार तालमेल पर अधिक ध्यान देना होगा।