नैक्सकार19 से कैंसर उपचार में भारत की स्वदेशी क्षमता को बल

नैक्सकार19 से कैंसर उपचार में भारत की स्वदेशी क्षमता को बल

कोलकाता स्थित कमान अस्पताल (पूर्वी कमान) ने 5 अक्टूबर 2026 को 39 वर्षीय सेवारत सैनिक को भारत की स्वदेशी सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा नैक्सकार19 दी। मरीज बी-सेल तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीड़ित था, जो उपचार के बाद फिर उभर आया था और जिस पर उपचार का पर्याप्त असर नहीं हुआ था।

सीएआर-टी चिकित्सा से मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नई भूमिका

सीएआर-टी एक प्रकार की प्रतिरक्षा चिकित्सा है। इसमें मरीज के टी-कोशिकाओं—जो श्वेत रक्त कोशिकाओं का हिस्सा हैं—को रक्त से एकत्र किया जाता है। प्रयोगशाला में इनके जीन में बदलाव कर ऐसा काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर बनाया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सके। इन संशोधित कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने के बाद उन्हें मरीज के शरीर में वापस डाला जाता है।

नैक्सकार19 की सीएआर-टी कोशिकाएं सीडी19 नामक प्रोटीन को निशाना बनाती हैं। यह प्रोटीन कई बी-कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है, जिनमें कुछ कैंसरग्रस्त कोशिकाएं भी शामिल हैं। बी-सेल तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया में अपरिपक्व बी-लिम्फोसाइट प्रभावित होते हैं। कैंसर के उपचार के बाद लौटने को ‘रिलैप्स्ड’ और उपचार का अपेक्षित असर न होने को ‘रेफ्रैक्टरी’ कहा जाता है।

नैक्सकार19 का स्वदेशी विकास और विशेषताएं

नैक्सकार19 भारत की पहली स्वदेशी सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा है। इसके विकास में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई, टाटा मेमोरियल सेंटर और जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी इम्यूनोएक्ट ने सहयोग किया। इसे ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे रक्त कैंसरों के उपचार के विकल्प के रूप में विकसित किया गया है।

इस चिकित्सा में प्रयुक्त संरचना को मानव-अनुकूल बनाया गया है। चूहे से प्राप्त घटकों वाली कुछ सीएआर-टी चिकित्सा में उपचार के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हो सकती है। मानव-अनुकूल घटकों को गंभीर तंत्रिका संबंधी दुष्प्रभावों के कम जोखिम से जोड़ा जाता है। नैक्सकार19 की अनुमानित कीमत पश्चिमी देशों में उपलब्ध ऐसी ही चिकित्सा की कीमत का लगभग दसवां हिस्सा है।

कमान अस्पतालों में उपचार की पहुंच

कोलकाता में यह उपचार कमान अस्पतालों में सीएआर-टी चिकित्सा के इस्तेमाल का दूसरा बताया गया मामला है। इससे पहले सितंबर 2026 में चंडीमंदिर स्थित कमान अस्पताल (पश्चिमी कमान) में इसी बीमारी से पीड़ित 16 वर्षीय मरीज को नैक्सकार19 दी गई थी। देश के कमान अस्पताल इस चिकित्सा को देने के लिए अधिकृत संस्थानों में शामिल हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सीएआर-टी चिकित्सा में मरीज की अपनी टी-कोशिकाओं को संशोधित करके कैंसर कोशिकाओं को पहचानने योग्य बनाया जाता है।
  • सीडी19 कई बी-कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला प्रोटीन है और नैक्सकार19 इसे लक्ष्य बनाती है।
  • नैक्सकार19 के विकास में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई, टाटा मेमोरियल सेंटर और इम्यूनोएक्ट शामिल रहे।
  • कमान अस्पताल (पूर्वी कमान) कोलकाता में और कमान अस्पताल (पश्चिमी कमान) चंडीमंदिर में स्थित है।

नैक्सकार19 का कमान अस्पतालों में उपयोग स्वदेशी उन्नत चिकित्सा की सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को दर्शाता है। इसकी अपेक्षाकृत कम कीमत भी रक्त कैंसर के उपचार में इसकी उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण है।

Originally written on October 7, 2026 and last modified on October 7, 2026.

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