भारत में स्टारलिंक के 20 गेटवे, सेवा शुरू होने से पहले मंजूरियों का इंतजार
स्टारलिंक ने भारत में उपग्रह संचार नेटवर्क के लिए 20 गेटवे स्थल तैयार किए हैं। इन केंद्रों पर सैकड़ों एंटेना लगाए गए हैं। हालांकि, कंपनी को व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले अंतिम सरकारी मंजूरियां और स्पेक्ट्रम आवंटन मिलना बाकी है।
गेटवे उपग्रह इंटरनेट को जमीनी नेटवर्क से जोड़ेंगे
उपग्रह गेटवे ऐसी जमीनी सुविधा होती है जो उपग्रह नेटवर्क और धरती पर मौजूद संचार प्रणालियों के बीच संपर्क स्थापित करती है। गेटवे के एंटेना उपग्रहों से संकेत भेजते और प्राप्त करते हैं। इसके जरिए उपग्रह उपयोगकर्ताओं का संपर्क इंटरनेट और दूरसंचार नेटवर्क से हो पाता है।
स्टारलिंक का नेटवर्क निम्न पृथ्वी कक्षा में घूमने वाले उपग्रहों पर आधारित है। यह कक्षा पृथ्वी से लगभग 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली है। इसके उलट, भूस्थिर उपग्रह भूमध्य रेखा के ऊपर लगभग 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करते हैं। उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड सेवा के लिए अंतरिक्ष में उपग्रहों के साथ गेटवे जैसे जमीनी ढांचे की भी जरूरत होती है।
भारत के नियमों के अनुरूप डेटा और सुरक्षा व्यवस्था
भारत मोबाइल कांग्रेस 2026 में स्टारलिंक के कारोबारी परिचालन की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने बताया कि कंपनी ने भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को देश के भीतर रखने के लिए भारत-विशिष्ट सुरक्षा नियंत्रण विकसित किए हैं। कंपनी के अनुसार, उसने घरेलू जरूरतों के अनुरूप परिचालन ढालने के लिए पांच वर्षों तक भारतीय नियामकों, उद्योग से जुड़े पक्षों और संचालकों के साथ काम किया है।
स्टारलिंक के पास वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत उपग्रह संचार यानी जीएमपीसीएस लाइसेंस है। भारत ने उपग्रह संचार क्षेत्र की तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं, जिनमें स्टारलिंक भी शामिल है। लेकिन लाइसेंस मिलने के बाद भी सेवा शुरू करने के लिए अंतिम सरकारी मंजूरी जरूरी है। इसमें सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन शामिल हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन के तहत दूरसंचार सेवाओं के लिए रेडियो आवृत्ति के विशिष्ट बैंड तय किए जाते हैं।
दूरसंचार कंपनियों के साथ सहयोग, पर सेवा अभी लंबित
स्टारलिंक ने भारत की दूरसंचार कंपनियों एयरटेल और जियो के साथ समझौता ज्ञापन किए हैं। ये समझौते घरेलू दूरसंचार संचालकों और उपग्रह संचार कंपनी के बीच सहयोग का आधार बनाते हैं। ड्रेयर ने 7 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत की तैयारी पूरी होने पर स्टारलिंक सेवा देने के लिए तैयार है। फिलहाल व्यावसायिक शुरुआत आवश्यक सरकारी अनुमतियों पर निर्भर है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जीएमपीसीएस का पूरा नाम वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत उपग्रह संचार है।
- निम्न पृथ्वी कक्षा पृथ्वी से लगभग 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई तक मानी जाती है।
- भूस्थिर उपग्रह भूमध्य रेखा से लगभग 35,786 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करते हैं।
- भारत में स्टारलिंक के 20 गेटवे स्थल हैं, जिन पर सैकड़ों एंटेना लगाए गए हैं।
भारत में उपग्रह इंटरनेट सेवा का विस्तार अब जमीनी ढांचे के साथ-साथ नियामकीय मंजूरियों पर भी निर्भर है। स्पेक्ट्रम और सुरक्षा संबंधी अंतिम स्वीकृतियां मिलने के बाद ही स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवा शुरू हो सकेगी।