भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता में हुई महत्वपूर्ण प्रगति
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से 22 से 24 जून 2026 के दौरान नई दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने भारतीय अधिकारियों के साथ अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) तथा व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने हालिया दौर की वार्ताओं में उल्लेखनीय प्रगति की पुष्टि की, हालांकि 24 जून 2026 तक किसी भी समझौते की अंतिम समय-सीमा घोषित नहीं की गई।
अंतरिम व्यापार समझौता क्या है?
अंतरिम व्यापार समझौता एक अस्थायी व्यवस्था होती है, जिसके माध्यम से दो देश व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) या संपूर्ण व्यापार संधि से पहले कुछ प्रमुख व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाते हैं। इस प्रकार के समझौते में आमतौर पर शुल्क (टैरिफ) में रियायतें, बाजार तक बेहतर पहुंच, कुछ विशेष क्षेत्रों में व्यापारिक सहयोग तथा सीमित आर्थिक प्रतिबद्धताएं शामिल होती हैं। भारत और अमेरिका के बीच इस अंतरिम व्यवस्था का प्रारूप फरवरी 2026 में तैयार किया गया था तथा इसे अप्रैल–मई 2026 तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया था।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA)
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की प्रक्रिया फरवरी 2025 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। इस समझौते के तहत दोनों देश कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- बाजार तक बेहतर पहुंच (Market Access)
- डिजिटल व्यापार
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाना
- गैर-शुल्कीय बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम करना
- रणनीतिक क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग
शामिल हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को अधिक सरल एवं प्रतिस्पर्धी बनाना है।
टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे
वार्ता के दौरान अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) भी प्रमुख विषय रहा। अमेरिका द्वारा विभिन्न व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क 24 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहने वाला है। भारत ने अमेरिका से इन शुल्क व्यवस्थाओं पर स्पष्टता की मांग की है तथा यह भी आग्रह किया है कि भारतीय उत्पादों को आसियान (ASEAN) देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक और प्राथमिकता वाले टैरिफ लाभ मिलें। दोनों देशों के बीच इन विषयों पर व्यावसायिक रूप से संतुलित समाधान खोजने के प्रयास जारी हैं।
मिशन 500 और व्यापारिक महत्व
भारत और अमेरिका ने ‘मिशन 500’ के तहत वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 200 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, फरवरी 2026 में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले में कुछ व्यापक शुल्कों को अमान्य घोषित किए जाने के बाद वैश्विक व्यापारिक वातावरण में भी बदलाव आया है, जिसका प्रभाव भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर भी देखा जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैमीसन ग्रीयर वर्तमान में अमेरिका के संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (U.S. Trade Representative) हैं।
- भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की वार्ता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी।
- मिशन 500 का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
- आसियान (ASEAN) का पूर्ण नाम दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (Association of Southeast Asian Nations) है।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि अंतरिम व्यापार समझौता और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं, तो इससे व्यापार, निवेश, रोजगार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में दोनों देशों की भूमिका और अधिक सशक्त होगी।