भारतीय सेना ने विकसित किए एआई आधारित ‘कौटिल्य’ और ‘क्यू-फोर्स’ डिजिटल सिस्टम

भारतीय सेना ने विकसित किए एआई आधारित ‘कौटिल्य’ और ‘क्यू-फोर्स’ डिजिटल सिस्टम

Indian Army ने वर्ष 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित दो नई डिजिटल प्रणालियाँ विकसित की हैं, जिनका नाम “कौटिल्य” और “क्यू-फोर्स” रखा गया है। इन प्रणालियों का उद्देश्य सैन्य कमान, खुफिया विश्लेषण और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को अधिक आधुनिक और डेटा-आधारित बनाना है। कौटिल्य एक एआई आधारित कमांड इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जबकि क्यू-फोर्स सैन्य आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स संचालन के लिए विकसित एकीकृत डिजिटल एप्लिकेशन है। भारतीय सेना इसे भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित युद्ध और डेटा आधारित संचालन की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।

कौटिल्य: एआई आधारित कमांड इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म

“कौटिल्य” को 21 से 25 मई 2026 के बीच लॉन्च किया गया। यह एक एआई-संचालित कमांड इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता करेगा। इस प्लेटफॉर्म में एआई आधारित डैशबोर्ड और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग यानी एनएलपी आधारित इंटरफेस का उपयोग किया गया है। इसके माध्यम से संरचित डेटा तैयार करना, विश्लेषण करना और निर्णय समर्थन उपलब्ध कराना संभव होगा। कौटिल्य सैनिकों, हथियारों, उपकरणों, प्रशिक्षण, रसद, राशन और संचालन तैयारी से जुड़े आंकड़ों को संसाधित कर सकता है। यह टैबलेट आधारित डेटा एंट्री सुविधा भी प्रदान करता है और प्रशासनिक तथा सैन्य कार्यों में “एआई को-पायलट” की तरह कार्य करता है।

क्यू-फोर्स: लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन

“क्यू-फोर्स” को 22 से 25 मई 2026 के बीच लॉन्च किया गया। यह सेना के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन के लिए विकसित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य सैन्य भंडार प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला संचालन और सैन्य संसाधनों की निरंतर उपलब्धता को अधिक व्यवस्थित बनाना है। यह एप्लिकेशन विभिन्न लॉजिस्टिक्स और इन्वेंटरी प्लेटफॉर्म को एकीकृत करता है, जिससे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अलग-अलग संचालन क्षेत्रों में भी बेहतर प्रबंधन संभव हो सके।

भारतीय सेना में एआई का बढ़ता उपयोग

Indian Army तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा आधारित प्रणालियों को अपनी सैन्य रणनीति का हिस्सा बना रही है। सेना ने वर्ष 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी” का वर्ष बताया है, जबकि 2027 तक पूर्ण एआई एकीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने 23 एआई आधारित अनुप्रयोगों का उपयोग किया था। इनमें ईसीएएस और त्रिनेत्र जैसे सिस्टम शामिल थे, जिन्हें Project SANJAY के अंतर्गत विकसित किया गया था।

तकनीकी महत्व और उपयोग

कौटिल्य संचालन और प्रशासन से जुड़े संरचित डेटा का उपयोग करता है, जिससे यह कमांड स्तर के निर्णयों के लिए उपयोगी बनता है। वहीं क्यू-फोर्स सैन्य तैयारियों के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों—लॉजिस्टिक्स, इन्वेंटरी और संसाधन प्रबंधन—पर केंद्रित है। आधुनिक युद्ध प्रणाली में इन क्षेत्रों की दक्षता को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Indian Army ने 2026 में कौटिल्य और क्यू-फोर्स विकसित किए।
  • नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वह शाखा है, जो मानव भाषा को समझने और संसाधित करने में सक्षम बनाती है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग डेटा विश्लेषण, पैटर्न पहचान और निर्णय समर्थन में किया जाता है।
  • Project SANJAY सैन्य डिजिटल एकीकरण से जुड़ी परियोजना है।
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने 23 एआई अनुप्रयोगों का उपयोग किया था।
  • क्यू-फोर्स का मुख्य कार्य सैन्य लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है।

भारतीय सेना की ये नई एआई प्रणालियाँ भविष्य की तकनीक-आधारित सैन्य रणनीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इससे कमांड, लॉजिस्टिक्स और निर्णय प्रक्रिया में दक्षता बढ़ने के साथ-साथ आधुनिक युद्ध प्रणाली में भारतीय सेना की क्षमता भी मजबूत होगी।

Originally written on May 26, 2026 and last modified on May 26, 2026.

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