दक्षिण कोरिया की परमाणु पनडुब्बी योजना से बढ़ेगी समुद्री शक्ति

दक्षिण कोरिया की परमाणु पनडुब्बी योजना से बढ़ेगी समुद्री शक्ति

दक्षिण कोरिया ने 26 मई 2026 को अपनी पहली स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी विकसित करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप जारी किया। इस परियोजना को “जांगबोगो एन प्रोजेक्ट” नाम दिया गया है। यह योजना दक्षिण कोरिया की उन्नत जहाज निर्माण क्षमता और परमाणु रिएक्टर तकनीक पर आधारित है। सरकार का लक्ष्य है कि यह पनडुब्बी 2030 के दशक के मध्य तक तैयार हो जाए और बाद में सक्रिय सेवा में शामिल की जाए। यह घोषणा दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत के चांगवोन में आयोजित “कमेटी ऑन फ्यूचर डिफेंस स्ट्रैटेजी” की पहली बैठक के दौरान की गई। इस परियोजना को क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांगबोगो एन प्रोजेक्ट क्या है?

जांगबोगो एन प्रोजेक्ट दक्षिण कोरिया की स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी निर्माण योजना है। इसका उद्देश्य ऐसी पनडुब्बियाँ विकसित करना है जो लंबे समय तक समुद्र के भीतर रह सकें और अत्याधुनिक रक्षा क्षमताओं से लैस हों। परमाणु-संचालित पनडुब्बियाँ पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में अधिक समय तक पानी के भीतर संचालन कर सकती हैं। इन्हें बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इनकी रणनीतिक क्षमता और गोपनीय संचालन शक्ति बढ़ जाती है।

पनडुब्बी योजना की तकनीकी विशेषताएँ

दक्षिण कोरिया की प्रस्तावित पनडुब्बियों में लो-एनरिच्ड यूरेनियम आधारित रिएक्टर का उपयोग किया जाएगा। लो-एनरिच्ड यूरेनियम में यूरेनियम-235 की मात्रा 20 प्रतिशत से कम होती है और इसका उपयोग कई नागरिक परमाणु परियोजनाओं में भी किया जाता है। इन रिएक्टरों को लंबे संचालन चक्र के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे ईंधन बदलने की आवश्यकता कम होगी। दक्षिण कोरिया इस परियोजना में घरेलू रिएक्टर तकनीक और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का उपयोग करेगा। इससे देश की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व

दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमता से उत्पन्न समुद्री खतरों का मुकाबला करना है। उत्तर कोरिया लगातार पनडुब्बी आधारित मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ी हैं। दक्षिण कोरिया ने यह भी कहा है कि वह परमाणु अप्रसार संधियों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करेगा। ईंधन आपूर्ति के लिए वह अमेरिका के साथ सहयोग करेगा तथा सुरक्षा और निगरानी संबंधी मामलों में International Atomic Energy Agency के साथ काम करेगा।

अमेरिका की स्वीकृति और औद्योगिक प्रभाव

अमेरिका ने 13 नवंबर 2026 को जारी संयुक्त तथ्य पत्रक में दक्षिण कोरिया की परमाणु-संचालित पनडुब्बी निर्माण योजना को मंजूरी दी। यह मंजूरी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद सामने आई। इस घोषणा के बाद दक्षिण कोरिया की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनियों Hanwha Ocean और HD Hyundai Heavy Industries के शेयरों में तेजी देखी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि परियोजना का आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव भी व्यापक हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • परमाणु-संचालित पनडुब्बियाँ लंबे समय तक समुद्र के भीतर रह सकती हैं और इन्हें बार-बार सतह पर आने की आवश्यकता नहीं होती।
  • लो-एनरिच्ड यूरेनियम में यूरेनियम-235 की मात्रा 20 प्रतिशत से कम होती है।
  • International Atomic Energy Agency परमाणु सुरक्षा और निरीक्षण के लिए जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय संस्था है।
  • दक्षिण कोरिया दुनिया के प्रमुख जहाज निर्माण देशों में शामिल है।
  • Hanwha Ocean और HD Hyundai Heavy Industries वैश्विक शिपबिल्डिंग उद्योग की प्रमुख कंपनियाँ हैं।

दक्षिण कोरिया की यह पहल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों को दर्शाती है। परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का विकास न केवल उसकी समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा उद्योग और सामरिक राजनीति में भी उसकी भूमिका को और प्रभावशाली बना सकता है।

Originally written on May 26, 2026 and last modified on May 26, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *