ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में भारत की वैश्विक भूमिका
भारत ने 1 जनवरी 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते हुए वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका को और मजबूत किया है। इसी क्रम में 14 मई 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। भारत ने अपनी अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है, जिसका उद्देश्य सहयोग, नवाचार और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
ब्रिक्स क्या है और इसका महत्व
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी समूह है। इसकी शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद के वर्षों में इसमें नए देशों को भी शामिल किया गया, जिससे इसका वैश्विक प्रभाव और बढ़ा। यह संगठन वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने का मंच माना जाता है।
भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताएं
भारत वर्ष 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की प्राथमिकता बहुपक्षवाद, सतत विकास, आर्थिक मजबूती और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना होगी। भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के हितों को सामने लाने और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग
ब्रिक्स देशों ने लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संस्थाओं को आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना जरूरी है। उनका मानना है कि विकासशील देशों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
नई दिल्ली में कूटनीतिक गतिविधियां
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका और बहुपक्षीय संवाद में उसकी बढ़ती भागीदारी स्पष्ट होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी।
- ब्रिक्स देशों की आबादी दुनिया की कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत से अधिक है।
- यह समूह वैश्विक जीडीपी में 32 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है।
- ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा की है।
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता को वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने के रूप में देखा जा रहा है। यह अवसर भारत को विश्व राजनीति और आर्थिक नीतियों में अपनी प्रभावशाली भूमिका स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।