बीओटी हाईवे परियोजना दिशानिर्देश
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 11 मई 2026 को हाईवे परियोजनाओं के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर यानी बीओटी मॉडल के दिशानिर्देशों में संशोधन किया। नए ढांचे के तहत बड़े निवेश फंड और संस्थागत निवेशकों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत बीओटी परियोजनाओं में बोली लगाने की अनुमति दी गई है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देना है।
बीओटी मॉडल क्या है
बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल है जिसमें निजी कंपनी या रियायतधारी सड़क परियोजना का वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव करता है। यह व्यवस्था एक निश्चित रियायत अवधि के लिए लागू होती है, जो आमतौर पर 20 से 30 वर्षों की होती है। रियायत अवधि समाप्त होने के बाद परियोजना को सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाता है। इस मॉडल का उद्देश्य सरकारी खर्च का बोझ कम करते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है।
संशोधित दिशानिर्देश और निवेशक
संशोधित नियमों के तहत सॉवरेन वेल्थ फंड, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, पेंशन फंड, प्राइवेट इक्विटी फंड, वैकल्पिक निवेश फंड और विदेशी निवेश फंड अब बीओटी परियोजनाओं में भाग ले सकेंगे। नई निविदा प्रक्रिया में संस्थागत निवेशकों का मूल्यांकन मुख्य रूप से उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर किया जाएगा। निर्माण संबंधी विशेषज्ञता को परियोजना मिलने के बाद इंजीनियरिंग साझेदारों या रियायतधारियों के माध्यम से पूरा किया जा सकेगा।
बीओटी और टीओटी मॉडल में अंतर
बीओटी परियोजनाओं में निर्माण और निष्पादन जोखिम शामिल होता है क्योंकि परियोजना सड़क बनने से पहले ही आवंटित कर दी जाती है। इसके विपरीत टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर यानी टीओटी मॉडल में पहले से संचालित राजमार्ग शामिल होते हैं जिनसे टोल राजस्व प्राप्त हो रहा होता है। पहले बड़े निवेश फंड मुख्य रूप से टीओटी परियोजनाओं तक सीमित थे, लेकिन नए संशोधनों के बाद वे बीओटी परियोजनाओं में भी निवेश कर सकेंगे।
राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति
पहले के बीओटी मॉडल के तहत लगभग 22,000 करोड़ रुपये की चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को कोई बोली नहीं मिली थी। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने बीओटी मॉडल को अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास किया है। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में कुल राजमार्ग आवंटनों में बीओटी परियोजनाओं की हिस्सेदारी को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रमुख क्रियान्वयन एजेंसियों में से एक है।
- वैकल्पिक निवेश फंड भारतीय वित्तीय नियमों के तहत विनियमित निवेश माध्यम हैं।
- सॉवरेन वेल्थ फंड सरकारी स्वामित्व वाले निवेश फंड होते हैं जो राष्ट्रीय भंडार का प्रबंधन करते हैं।
- टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पहले से चालू राजमार्गों और उनके टोल संग्रह पर आधारित होता है।
संशोधित बीओटी दिशानिर्देश भारत में सड़क अवसंरचना क्षेत्र में निजी और संस्थागत निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इससे भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के विकास और वित्तपोषण को नई गति मिलने की उम्मीद है।