प्लास्टिक कचरे से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की नई तकनीक

प्लास्टिक कचरे से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की नई तकनीक

दुनिया भर में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण और स्वच्छ ऊर्जा की मांग के बीच वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोजन ईंधन में बदलने की नई तकनीक विकसित की है। इस प्रक्रिया को “फोटोरीफॉर्मिंग” कहा जाता है, जिसमें सौर ऊर्जा और विशेष प्रकाश-संवेदनशील उत्प्रेरकों की मदद से प्लास्टिक को कम तापमान पर तोड़कर हाइड्रोजन और औद्योगिक रसायनों में परिवर्तित किया जाता है। वर्ष 2026 में इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शोध सामने आए, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं।

प्लास्टिक फोटोरीफॉर्मिंग क्या है

फोटोरीफॉर्मिंग एक फोटो-कैटलिटिक प्रक्रिया है, जिसमें सूर्य के प्रकाश या कृत्रिम रोशनी का उपयोग करके रासायनिक अभिक्रियाएं कराई जाती हैं। इस तकनीक में पॉलीइथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे प्लास्टिक पॉलिमर को तोड़कर हाइड्रोजन, सिंथेसिस गैस यानी सिंगैस, एसिटिक एसिड और अन्य हाइड्रोकार्बन उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं। विशेष बात यह है कि कुछ प्रयोगशाला प्रणालियों में यह प्रक्रिया सामान्य तापमान और दबाव पर भी संचालित की जा सकती है। यह पारंपरिक वाटर स्प्लिटिंग तकनीक से अलग है, क्योंकि प्लास्टिक का ऑक्सीकरण पानी की तुलना में आसान होता है, जिससे हाइड्रोजन उत्पादन के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

वर्ष 2026 के प्रमुख शोध

University of Cambridge के वैज्ञानिकों ने एक मजबूत फोटो-कैटलिस्ट विकसित किया, जिसने प्रयोगशाला परीक्षणों में 260 घंटे से अधिक समय तक बिना प्रदर्शन घटे कार्य किया। इस प्रणाली में पुरानी कार बैटरियों के अम्ल का उपयोग किया गया और कठिनाई से पुनर्चक्रित होने वाले प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोजन तथा औद्योगिक रसायनों में बदला गया। वहीं University of Adelaide के शोधकर्ताओं ने 28 अप्रैल 2026 को Chem Catalysis में प्रकाशित अध्ययन में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोजन, सिंगैस और अन्य रसायनों में बदलने की प्रक्रिया का विश्लेषण किया। इसी विश्वविद्यालय की एक अन्य प्रक्रिया में गैर-विषैले और धातु-रहित कार्बन उत्प्रेरक का उपयोग करके पॉलीइथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन से हाइड्रोजन और तरल ईंधन तैयार किए गए।

प्लास्टिक कचरा और सर्कुलर अपसाइक्लिंग

वैश्विक स्तर पर हर वर्ष 40 करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है, लेकिन इसका केवल 10 से 18 प्रतिशत हिस्सा ही पुनर्चक्रित हो पाता है। मिश्रित पॉलिमर, दूषित पैकेजिंग और एकल-उपयोग प्लास्टिक को पुनर्चक्रित करना सबसे कठिन माना जाता है। ऐसी स्थिति में “सर्कुलर अपसाइक्लिंग” की अवधारणा महत्वपूर्ण बन जाती है। इसका अर्थ है अपशिष्ट पदार्थों को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलना। इस नई तकनीक में प्लास्टिक कचरे को स्वच्छ हाइड्रोजन और औद्योगिक रसायनों के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

हाइड्रोजन और सिंगैस का महत्व

हाइड्रोजन को स्वच्छ ईंधन माना जाता है और इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, रिफाइनिंग तथा अमोनिया निर्माण में किया जाता है। यदि इसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा आधारित प्रक्रियाओं से किया जाए, तो इसे क्लीन फ्यूल की श्रेणी में रखा जाता है। सिंगैस हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण होता है, जिसका उपयोग रासायनिक संश्लेषण और ईंधन उत्पादन में किया जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • फोटो-कैटलिसिस प्रकाश आधारित रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें उत्प्रेरक अभिक्रिया को तेज करता है।
  • पॉलीइथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन सबसे अधिक उपयोग होने वाले प्लास्टिक हैं।
  • हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल दोनों रूपों में किया जाता है।
  • सिंगैस हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण होता है।

प्लास्टिक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने की यह तकनीक भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो इससे प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ-साथ हरित ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Originally written on May 7, 2026 and last modified on May 7, 2026.

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