तमिलनाडु के पूर्वी घाट में खोजी गई नई पौध प्रजाति ‘साइफोस्टेम्मा अन्नामलाई’

तमिलनाडु के पूर्वी घाट में खोजी गई नई पौध प्रजाति ‘साइफोस्टेम्मा अन्नामलाई’

भारत में जैव विविधता और वनस्पति अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। 7 मई 2026 को तमिलनाडु के दक्षिणी पूर्वी घाट क्षेत्र में एक नई पौध प्रजाति की खोज की गई, जिसका नाम “साइफोस्टेम्मा अन्नामलाई” रखा गया है। यह प्रजाति अंगूर कुल यानी Vitaceae से संबंधित है और इसे विलुप्पुरम जिले के संजीवी पहाड़ी क्षेत्र में खोजा गया। इस खोज ने भारत की वनस्पति विविधता को लेकर वैज्ञानिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

टैक्सोनॉमी और नामकरण

साइफोस्टेम्मा एक वनस्पति वंश है, जो विटेसी कुल के अंतर्गत आता है। इस कुल में बेलनुमा और झाड़ीदार पौधे शामिल होते हैं। नई खोजी गई प्रजाति का नाम “अन्नामलाई” प्रसिद्ध शिक्षाविद और Annamalai University के संस्थापक राजा सर अन्नामलाई चेट्टियार के सम्मान में रखा गया है। वनस्पति विज्ञान में किसी नई प्रजाति का नामकरण अक्सर किसी वैज्ञानिक, स्थान या विशिष्ट व्यक्ति के सम्मान में किया जाता है।

खोज का स्थान और प्राकृतिक आवास

यह पौधा तमिलनाडु के पनैमलाईपेट्टई क्षेत्र में दक्षिणी पूर्वी घाट की पहाड़ियों में पाया गया। इसकी खोज लगभग 86 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में की गई। यह पौधा खुले झाड़ीदार वनस्पति क्षेत्र में उगा हुआ मिला, जो उष्णकटिबंधीय शुष्क वन पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। उष्णकटिबंधीय शुष्क वन प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में पाए जाते हैं और यहां की वनस्पतियां गर्म तथा अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु के अनुकूल होती हैं।

पौधे की विशेषताएं और वैज्ञानिक अध्ययन

L. Mullainathan, जो अन्नामलाई विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के प्रमुख हैं, ने इस नई प्रजाति की पहचान की। उन्होंने इसकी पत्तियों की वृद्धि प्रक्रिया, फल के आकार और रंग में अन्य संबंधित प्रजातियों से अलग विशेषताएं देखीं। इस खोज से संबंधित शोध मार्च 2026 में Phytotaxa नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित किया गया। साथ ही इस पौधे के हर्बेरियम नमूनों को St. Joseph’s College और Botanical Survey of India के कोयंबटूर केंद्र में संरक्षित किया गया है।

भारत में वनस्पति सर्वेक्षण का महत्व

भारत में नई पौध प्रजातियों की खोज और उनका दस्तावेजीकरण हर्बेरियम नमूनों और वैज्ञानिक पत्रिकाओं के माध्यम से किया जाता है। हर्बेरियम ऐसे संरक्षित पौध नमूने होते हैं, जिनका उपयोग पहचान और वर्गीकरण अध्ययन के लिए किया जाता है। बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया देश की प्रमुख संस्था है, जो पौधों के सर्वेक्षण, पहचान और दस्तावेजीकरण का कार्य करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तट के साथ फैली असतत पर्वत श्रृंखला है।
  • विटेसी कुल में अंगूर और उससे संबंधित कई पौध वंश शामिल हैं।
  • हर्बेरियम नमूने पौधों की पहचान और वर्गीकरण अध्ययन में उपयोग किए जाते हैं।
  • फाइटोटैक्सा एक पीयर-रिव्यू वैज्ञानिक पत्रिका है, जो वनस्पति वर्गीकरण शोध प्रकाशित करती है।

तमिलनाडु में खोजी गई यह नई पौध प्रजाति भारत की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस तरह की खोजें न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देती हैं, बल्कि वन संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की समझ को भी मजबूत बनाती हैं।

Originally written on May 7, 2026 and last modified on May 7, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *