प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना से दो लाख से अधिक उद्यमों को मिला लाभ
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संगठित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 11 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत देशभर में दो लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। जून 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पीएमएफएमई योजना क्या है?
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना का संचालन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक स्वरूप प्रदान करना और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है। इस योजना के अंतर्गत उद्यमियों को ऋण से जुड़ी वित्तीय सहायता, स्वयं सहायता समूहों के लिए सीड कैपिटल, कौशल प्रशिक्षण तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए साझा आधारभूत ढांचे (कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर) की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
निवेश और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि
योजना के माध्यम से अब तक 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के परियोजना निवेश को बढ़ावा मिला है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इन रोजगारों में उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और इससे संबंधित अन्य गतिविधियां शामिल हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और स्थानीय उद्योगों को भी नई गति मिली है।
महिलाओं और नए उद्यमियों को मिला प्रोत्साहन
पीएमएफएमई योजना के लाभार्थियों में लगभग 90 प्रतिशत प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं, जबकि 44 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। यह योजना महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसके अलावा योजना के तहत समर्थित 75,000 से अधिक उद्यम उद्यम पंजीकरण, उद्यम असिस्ट, एफएसएसएआई और जीएसटी जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। इससे उन्हें बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और बड़े बाजारों तक बेहतर पहुंच प्राप्त हुई है।
प्रशिक्षण और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर
योजना के तहत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को सीड कैपिटल सहायता प्रदान की गई है। वहीं 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें लगभग 77 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए हैं। इनमें से 32 केंद्र 11 जुलाई 2026 तक संचालित हो चुके थे। ये केंद्र नए उद्यमियों को आधुनिक मशीनों, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराते हैं।
योजना का विस्तार और भविष्य
केंद्र सरकार ने इस योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है। साथ ही मंत्रालय पीएमएफएमई 2.0 शुरू करने पर भी विचार कर रहा है, जिसमें संशोधित और अधिक प्रभावी प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इससे सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को और अधिक प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना जून 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई थी।
- योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों को सीड कैपिटल सहायता प्रदान की जाती है।
- एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) भारत में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता का नियामक संस्थान है।
- जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) भारत में लागू एक प्रमुख अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना ने छोटे उद्यमों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और औपचारिक पहचान प्रदान कर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा दी है। यह योजना रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति प्रदान कर रही है।