प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को दी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 से 16 जून 2026 तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा की। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा रही। यह दौरा प्रधानमंत्री के तीन देशों के यूरोपीय दौरे के दूसरे चरण के रूप में आयोजित किया गया और इसका मुख्य केंद्र स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा रहा। इस यात्रा को भारत और स्लोवाकिया के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों की पृष्ठभूमि
स्लोवाकिया के 1993 में स्वतंत्र देश बनने के बाद भारत और स्लोवाकिया के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा की थी, जबकि फरवरी 2026 में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए थे। इन निरंतर संपर्कों ने दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रमुख नेताओं से मुलाकात
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात की। ब्रातिस्लावा पहुंचने पर उनका स्वागत स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार ने किया। इस अवसर पर उन्हें ब्रेड और नमक भेंट किया गया, जो स्लोवाकिया की पारंपरिक अतिथि-सत्कार की प्रथा मानी जाती है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
भारत और स्लोवाकिया के बीच हुई वार्ताओं में व्यापार, निवेश, नवाचार, ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे विकास और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। आधुनिक विनिर्माण और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।
रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी
भारत और स्लोवाकिया के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्लोवाकिया कई वर्षों से भारत को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने भी स्लोवाकिया को सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति शुरू की है। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।
व्यापारिक संबंधों में तेजी
भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार पहली बार 1 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया था। इसके बाद 2025 में यह बढ़कर 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की मजबूती और व्यापारिक संभावनाओं को दर्शाती है।
भारतीय कामगारों की भूमिका
स्लोवाकिया के औद्योगिक क्षेत्र में भारतीय कामगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जून 2026 तक लगभग 11,000 भारतीय श्रमिक विभिन्न स्लोवाक उद्योगों में कार्यरत थे। स्लोवाकिया ने भारत से 1 लाख से अधिक अतिरिक्त कामगारों की आवश्यकता भी व्यक्त की है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच श्रम और कौशल आधारित सहयोग को और बढ़ाने के अवसर प्रदान करती है।
रणनीतिक महत्व
स्लोवाकिया मध्य यूरोप में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है और यूरोपीय बाजारों तक पहुंच के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के लिए स्लोवाकिया के साथ बढ़ते संबंध यूरोप में आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की व्यापक नीति का हिस्सा हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्लोवाकिया मध्य यूरोप का एक स्थलरुद्ध (Landlocked) देश है।
- ब्रातिस्लावा स्लोवाकिया की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है।
- स्लोवाकिया वर्ष 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद स्वतंत्र देश बना।
- भारत और स्लोवाकिया दोनों संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं।
- 1993 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा थी।
- वर्ष 2025 में भारत-स्लोवाकिया द्विपक्षीय व्यापार 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
- स्लोवाकिया में जून 2026 तक लगभग 11,000 भारतीय कामगार कार्यरत थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण प्रतीक है। व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है और भविष्य में यूरोप के साथ भारत के व्यापक सहयोग को भी मजबूत कर सकती है।