पैराक्वाट हर्बीसाइड पर बढ़ी वैश्विक चिंता
दुनिया भर में कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले रसायनों को लेकर लगातार बहस तेज हो रही है। इसी क्रम में पैराक्वाट नामक हर्बीसाइड एक बार फिर चर्चा में है। यह एक व्यापक प्रभाव वाला खरपतवारनाशी रसायन है, जिसका उपयोग खेतों और गैर-कृषि क्षेत्रों में खरपतवार तथा घास नियंत्रण के लिए किया जाता है। हालांकि इसकी विषाक्तता और स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों को लेकर कई देशों में इसे प्रतिबंधित किया जा चुका है। अमेरिका में भी यह लगातार नियामकीय समीक्षा और कानूनी विवादों के केंद्र में बना हुआ है।
पैराक्वाट क्या है
पैराक्वाट एक नॉन-सेलेक्टिव कॉन्टैक्ट हर्बीसाइड है, जिसका अर्थ है कि यह संपर्क में आने वाले अधिकांश पौधों को नष्ट कर देता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेतों को खरपतवार मुक्त रखने के लिए किया जाता है। अमेरिका में इसका उपयोग केवल प्रमाणित उपयोगकर्ताओं तक सीमित है और इसे “रिस्ट्रिक्टेड यूज़ पेस्टिसाइड” की श्रेणी में रखा गया है। यह नियम अमेरिका के संघीय कीटनाशक कानून “फेडरल इंसेक्टिसाइड, फंगीसाइड एंड रोडेन्टिसाइड एक्ट” के अंतर्गत लागू किए जाते हैं।
विभिन्न देशों में प्रतिबंध और नए प्रस्ताव
पैराक्वाट को उसकी विषाक्त प्रकृति के कारण दुनिया के 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है। चीन और ब्राजील जैसे देशों ने भी इसके उपयोग पर रोक लगा दी है। अमेरिका में भी कई राज्यों में इसे प्रतिबंधित करने या इसके उपयोग को सीमित करने के प्रयास जारी हैं। मई 2026 तक वरमोंट राज्य की सीनेट ने H.739 विधेयक को प्रारंभिक मंजूरी दी थी, जिसमें पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा हवाई, यूटा और वेस्ट वर्जीनिया जैसे राज्यों में स्कूलों के आसपास इसके छिड़काव पर रोक लगाने के प्रस्ताव सामने आए हैं।
स्वास्थ्य संबंधी विवाद और मुकदमे
पैराक्वाट को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर है। कई अध्ययनों और मुकदमों में दावा किया गया है कि लंबे समय तक पैराक्वाट के संपर्क में रहने से पार्किंसंस रोग का खतरा बढ़ सकता है। अमेरिका में लगभग 8,000 मामलों में पैराक्वाट निर्माताओं जैसे Syngenta और Chevron के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि रसायन के लंबे उपयोग से न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी पार्किंसंस विकसित हुई। हालांकि अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी यानी United States Environmental Protection Agency ने नवंबर 2025 में कहा था कि उसे लेबल के अनुसार उपयोग किए गए पैराक्वाट और पार्किंसंस या कैंसर जैसे रोगों के बीच स्पष्ट संबंध नहीं मिला है। एजेंसी ने यह भी माना कि इस विषय पर उपलब्ध शोध परिणाम परस्पर विरोधी हैं।
उत्पादन बंद करने की घोषणा
मार्च 2026 में सिंगेंटा क्रॉप प्रोटेक्शन ने घोषणा की कि वह जून 2026 के अंत तक वैश्विक स्तर पर पैराक्वाट का उत्पादन बंद कर देगी। वहीं अमेरिका के मिसिसिपी स्थित वेन काउंटी में स्थित एक संयंत्र को 2024 में देश का सबसे बड़ा पैराक्वाट उत्सर्जक बताया गया, जहां से 47,000 पाउंड से अधिक वायु उत्सर्जन दर्ज किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पैराक्वाट एक नॉन-सेलेक्टिव कॉन्टैक्ट हर्बीसाइड है।
- अमेरिका में इसे “रिस्ट्रिक्टेड यूज़ पेस्टिसाइड” की श्रेणी में रखा गया है।
- पार्किंसंस रोग एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है।
- 70 से अधिक देशों में पैराक्वाट के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
कृषि उत्पादन बढ़ाने में रासायनिक हर्बीसाइड्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इनके स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताएं भी लगातार बढ़ रही हैं। पैराक्वाट पर चल रही वैश्विक बहस यह संकेत देती है कि भविष्य में कृषि रसायनों के उपयोग और नियमन को लेकर और अधिक सख्त नीतियां देखने को मिल सकती हैं।