आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में बनेगा विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण परिसर

आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में बनेगा विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण परिसर

भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation और Aeronautical Development Agency ने आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के पुट्टपर्थी में एक अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन एंड फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की योजना बनाई है। इस परियोजना को रक्षा मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और इसे भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों, विशेष रूप से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए परियोजना से जोड़ा गया है।

एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स क्या है

एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स एक विशेष विमानन सुविधा होती है, जहां विमानों की असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, ग्राउंड परीक्षण और उड़ान परीक्षण किए जाते हैं। ऐसे परिसरों में रनवे, हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, नेविगेशनल सिस्टम और मौसम संबंधी सहायता अवसंरचना उपलब्ध होती है। यह रक्षा विमान निर्माण और परीक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पुट्टपर्थी परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 350 एकड़ भूमि प्रस्तावित की है। इसमें 150 एकड़ भूमि पुट्टपर्थी रनवे के पास दी जाएगी, जबकि 200 एकड़ भूमि सैटेलाइट कार्यालय परिसर और आवासीय टाउनशिप के लिए निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने रनवे की लंबाई बढ़ाकर 10,000 फीट करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, नेविगेशनल सहायता प्रणाली और मौसम सहायता सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है।

एएमसीए कार्यक्रम से जुड़ाव

यह परियोजना भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी Advanced Medium Combat Aircraft कार्यक्रम से जुड़ी हुई है। एएमसीए भारत का प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 140 अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के निर्माण की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप वर्ष 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक तैयार किया जा सकता है, जबकि इसकी पहली उड़ान 2028 तक होने की संभावना है। यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

पुट्टपर्थी को क्यों चुना गया

पुट्टपर्थी को इस परियोजना के लिए चुनने के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। यह स्थान बेंगलुरु के निकट स्थित है, जो भारत का प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान केंद्र माना जाता है। इसके अलावा यहां समर्पित एयरस्पेस उपलब्ध है, जिससे उड़ान परीक्षण के दौरान वाणिज्यिक विमानों के यातायात से बाधा नहीं आती। इससे परीक्षण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी, डीआरडीओ के अंतर्गत कार्य करती है।
  • एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
  • पुट्टपर्थी आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले में स्थित है।
  • पुट्टपर्थी रनवे की लंबाई 10,000 फीट तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

भारत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है। पुट्टपर्थी में बनने वाला यह विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण परिसर न केवल एएमसीए कार्यक्रम को गति देगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा विमान निर्माण क्षेत्र में भी मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Originally written on May 7, 2026 and last modified on May 7, 2026.

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