परिवहन अर्थशास्त्र के लिए भारत का पहला समर्पित अनुसंधान केंद्र स्थापित होगा
भारत में सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक्स और गतिशीलता से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर गहन शोध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) ने 23 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत “एनएचएआई सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स ऑफ ट्रांसपोर्टेशन, मोबिलिटी एंड लॉजिस्टिक्स” की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र देश का पहला स्थायी और स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान होगा, जो परिवहन, गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स के आर्थिक पहलुओं पर विशेष रूप से कार्य करेगा।
संस्थागत ढांचा और संचालन व्यवस्था
प्रस्तावित केंद्र को NCAER परिसर में स्थापित किया जाएगा। इसकी स्थापना और संचालन के लिए NHAI अगले 10 वर्षों तक संस्थापक सहयोग के रूप में वित्तीय और संस्थागत समर्थन प्रदान करेगा। केंद्र के कार्यों का मार्गदर्शन करने के लिए अर्थशास्त्रियों, परिवहन विशेषज्ञों, सार्वजनिक नीति विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की एक सलाहकार समिति गठित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अनुसंधान प्राथमिकताओं और परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक अलग संचालन समिति भी बनाई जाएगी।
किन विषयों पर होगा शोध?
यह केंद्र राष्ट्रीय राजमार्गों के आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करने के साथ-साथ माल परिवहन लॉजिस्टिक्स, विभिन्न परिवहन माध्यमों के एकीकरण, राजमार्ग निवेशों के क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव, टोल नीति, परिसंपत्ति मुद्रीकरण, सड़क सुरक्षा तथा राजमार्गों के संचालन एवं रखरखाव में नई तकनीकों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध करेगा। इन शोधों का उद्देश्य भारत की परिवहन अवसंरचना को अधिक कुशल, सुरक्षित और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना है। साथ ही, यह केंद्र भविष्य की परिवहन नीतियों और निवेश निर्णयों के लिए वैज्ञानिक आधार भी प्रदान करेगा।
नीति निर्माण में मिलेगी सहायता
केंद्र द्वारा तैयार किए जाने वाले नीति-पत्र, कार्यपत्र, अनुसंधान रिपोर्ट, परामर्श दस्तावेज और शैक्षणिक अध्ययन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के लिए उपयोगी होंगे। इन अध्ययनों के आधार पर सरकार परिवहन क्षेत्र से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी और डेटा-आधारित बना सकेगी। भारत में तेजी से विकसित हो रहे सड़क नेटवर्क और बढ़ती लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं को देखते हुए यह केंद्र नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखता है।
भारत में परिवहन अवसंरचना का बढ़ता महत्व
राष्ट्रीय राजमार्ग देश की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं। माल परिवहन, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान समय में सरकार राजमार्ग निर्माण के साथ-साथ परिसंपत्ति मुद्रीकरण, टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दे रही है। ऐसे में परिवहन अर्थशास्त्र पर केंद्रित एक समर्पित अनुसंधान संस्थान की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की स्थापना वर्ष 1988 में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 के तहत की गई थी।
- राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने आर्थिक नीति अनुसंधान संस्थानों में से एक है।
- राष्ट्रीय राजमार्गों का वर्गीकरण राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किया जाता है।
- परिसंपत्ति मुद्रीकरण के प्रमुख मॉडल में टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) शामिल हैं।
- भारत का सड़क नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े सड़क नेटवर्कों में से एक माना जाता है।
NHAI और NCAER की यह पहल भारत में परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के आर्थिक अध्ययन को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। यह केंद्र न केवल नीति निर्माण को मजबूत करेगा, बल्कि देश की अवसंरचना विकास रणनीतियों को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।