न्यायमूर्ति वी. मोहना बनीं सुप्रीम कोर्ट की 12वीं महिला न्यायाधीश
भारत के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए न्यायमूर्ति वी. मोहना ने 2 जून 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही वह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला न्यायाधीश बन गई हैं। इसके अलावा, वह वर्ष 2018 में न्यायमूर्ति Indu Malhotra के बाद बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला अधिवक्ता भी बन गई हैं। उनकी नियुक्ति को भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक महत्व
Supreme Court of India भारत के संविधान के अंतर्गत स्थापित सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। इसकी स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। सुप्रीम कोर्ट संविधान की व्याख्या, मौलिक अधिकारों की रक्षा और केंद्र तथा राज्यों के बीच विवादों के निपटारे जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है। यह देश की अंतिम अपीलीय अदालत भी है, जिसके निर्णय पूरे भारत में बाध्यकारी होते हैं।
कॉलेजियम प्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया
भारत में उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिशें कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश करते हैं और इसमें सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। न्यायमूर्ति वी. मोहना की नियुक्ति की सिफारिश 27 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 31 मई 2026 को इस सिफारिश को मंजूरी प्रदान की।
महिला प्रतिनिधित्व को मिला नया आयाम
न्यायमूर्ति वी. मोहना की नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व के विस्तार का प्रतीक है। उनसे पहले न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा सर्वोच्च न्यायालय में सीधे बार से नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिवक्ता बनी थीं। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत महिला न्यायाधीशों में B.V. Nagarathna भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति मोहना का शामिल होना न्यायिक नेतृत्व में लैंगिक संतुलन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्यायिक क्षमता और कार्यकाल
न्यायमूर्ति मोहना के शपथ ग्रहण के बाद सर्वोच्च न्यायालय की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जबकि स्वीकृत कुल संख्या 38 है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति वी. मोहना जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी। इस प्रकार उनका कार्यकाल लगभग पांच वर्षों का होगा, जिसके दौरान वे अनेक महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी मामलों की सुनवाई का हिस्सा बन सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत का सर्वोच्च न्यायालय 28 जनवरी 1950 से कार्यरत है।
- सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 38 है।
- न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा वर्ष 2018 में बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिवक्ता बनी थीं।
- कॉलेजियम प्रणाली उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करती है।
- न्यायमूर्ति वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला न्यायाधीश हैं।
न्यायमूर्ति वी. मोहना की नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समावेशिता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उनकी उपस्थिति सर्वोच्च न्यायालय में विविध अनुभवों और दृष्टिकोणों को मजबूत करेगी तथा न्यायिक संस्थाओं में लैंगिक प्रतिनिधित्व को और अधिक प्रोत्साहन प्रदान करेगी।