नई दिल्ली में फुटवियर उद्योग को मिला विस्तार का मंच
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 6 से 8 अगस्त 2026 तक 10वां इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर (IIFF) आयोजित किया गया। तीन दिवसीय यह बी2बी प्रदर्शनी भारत के फुटवियर उद्योग, निवेश संभावनाओं और निर्यात क्षमता को सामने लाने के उद्देश्य से आयोजित हुई। इसका आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन भारत व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO) ने कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन फुटवियर इंडस्ट्रीज (CIFI) के साथ मिलकर किया।
फुटवियर उद्योग की आर्थिक अहमियत
भारत का फुटवियर क्षेत्र रोजगार और उत्पादन, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह लगभग 45 लाख लोगों को रोजगार देता है और वैश्विक फुटवियर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 12% से 13% के बीच मानी जाती है। हालांकि निर्यात के मोर्चे पर भारत की हिस्सेदारी अभी लगभग 2% है, जो यह दिखाती है कि घरेलू उत्पादन क्षमता के मुकाबले वैश्विक बाजार में विस्तार की काफी गुंजाइश है।
ऐसे आयोजनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये उद्योग को नए खरीदारों, तकनीक, डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ते हैं। बी2बी मंच होने के कारण यहां सीधे व्यापारिक समझौते, साझेदारी और निवेश की संभावनाएं बनती हैं।
पीएलआई योजना और विनिर्माण को बढ़ावा
फुटवियर क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना का उपयोग विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है। यह योजना केंद्रीय स्तर पर incremental production और sales से जुड़ी होती है, जिससे उद्योग को विस्तार के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है।
फुटवियर उद्योग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र में पीएलआई का असर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सप्लाई चेन, मशीनरी, डिजाइनिंग और गुणवत्ता सुधार जैसे क्षेत्रों में भी गति आती है।
तकनीकी वस्त्रों की बढ़ती भूमिका
फुटवियर निर्माण में तकनीकी वस्त्रों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ये ऐसे कपड़े होते हैं जिनका उपयोग सौंदर्य के बजाय कार्यात्मक जरूरतों के लिए किया जाता है। जूतों के निर्माण में इनका इस्तेमाल अपर, लाइनिंग, रिइनफोर्समेंट और परफॉर्मेंस लेयर जैसे हिस्सों में होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटवियर निर्माण में तकनीकी फैब्रिक सामग्री का आधार 90% से अधिक है।
यह रुझान बताता है कि फुटवियर उद्योग अब केवल पारंपरिक चमड़ा या सामान्य सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च प्रदर्शन, टिकाऊपन और आराम पर आधारित आधुनिक सामग्री की ओर बढ़ रहा है।
बिहार पर विशेष सत्र और निवेश की संभावनाएं
मेले के दौरान “Bihar: The Next Frontier of Global Footwear Manufacturing” शीर्षक से एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें बिहार को फुटवियर और लेदर मैन्युफैक्चरिंग के उभरते केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। राज्य को इस क्षेत्र में 125 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे लगभग 1,800 रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है।
यह संकेत देता है कि फुटवियर उद्योग का विस्तार अब केवल पारंपरिक औद्योगिक राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत के राज्यों में भी नए अवसर बन रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर (IIFF) का 10वां संस्करण 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ।
- ITPO, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- CIFI का पूरा नाम Confederation of Indian Footwear Industries है।
- भारत का फुटवियर निर्यात वैश्विक कुल निर्यात का लगभग 2% है।
कुल मिलाकर, IIFF 2026 ने यह दिखाया कि फुटवियर उद्योग भारत में रोजगार, निवेश और निर्यात वृद्धि का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। बिहार जैसे राज्यों में उभरती संभावनाएं इस सेक्टर के भौगोलिक विस्तार की नई दिशा भी दिखाती हैं।