ओडिशा में फूड प्रोसेसिंग निवेश से रोजगार और औद्योगिक विस्तार की नई राह
ओडिशा ने फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में 43,437 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हासिल कर औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा संकेत दिया है। 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ओडिशा फूड प्रो-2026 के दौरान यह निवेश सामने आया। खास बात यह रही कि यह राज्य के बाहर आयोजित पहला सेक्टर-विशिष्ट निवेश रोडशो था, जिसे ASSOCHAM के सहयोग से आयोजित किया गया।
फूड प्रो-2026 से निवेशकों का भरोसा
कार्यक्रम के पहले दिन राज्य सरकार ने 27 कंपनियों के साथ 41,748 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इन MoUs से 35,252 रोजगार अवसर बनने का अनुमान है। इसके अलावा 12 निवेश इंटेंट फॉर्म्स (IIFs) के जरिए 1,689 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले, जिनसे लगभग 8,064 नौकरियों की संभावना जताई गई है। इस तरह पहले दिन कुल संभावित रोजगार 43,316 तक पहुंचने का अनुमान रखा गया।
ओडिशा सरकार के अनुसार, यह निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं है, बल्कि राज्य में खाद्य प्रसंस्करण आधारित औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
खाद्य प्रसंस्करण क्यों है अहम
खाद्य प्रसंस्करण कृषि उत्पादों को उपभोग योग्य या अर्ध-प्रसंस्कृत उत्पादों में बदलने की औद्योगिक प्रक्रिया है। भारत में यह क्षेत्र फलों, सब्जियों, अनाज, डेयरी, मांस, मत्स्य उत्पादों, पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
इस क्षेत्र में निवेश के लिए कोल्ड-चेन, वेयरहाउसिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं बेहद जरूरी मानी जाती हैं। इसी वजह से राज्य सरकारें अक्सर फूड पार्क, क्लस्टर-आधारित यूनिट और निर्यातोन्मुख सुविधाओं पर जोर देती हैं।
ओडिशा की पांच-सूत्रीय रणनीति
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस मौके पर क्षेत्र के लिए पांच-सूत्रीय रोडमैप पेश किया। इसमें विशेष खाद्य क्लस्टर, एकीकृत कोल्ड-चेन नेटवर्क, खाद्य गुणवत्ता प्रमाणन, एमएसएमई और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी, तथा कार्यबल के कौशल विकास पर फोकस शामिल है।
यह रणनीति बताती है कि ओडिशा केवल बड़े निवेश आकर्षित करने पर नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यमिता, महिला भागीदारी और सप्लाई चेन की मजबूती पर भी ध्यान दे रहा है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- MoU यानी Memorandum of Understanding एक औपचारिक समझौता होता है, जिसमें संभावित सहयोग की रूपरेखा दर्ज की जाती है।
- IIF यानी Investment Intent Form निवेशक की प्रारंभिक रुचि को दर्शाने वाला दस्तावेज होता है।
- ASSOCHAM भारत के सबसे पुराने उद्योग संगठनों में से एक है, जो व्यापार और निवेश नीति से जुड़े मुद्दों पर काम करता है।
- भारत में फूड प्रोसेसिंग को कृषि और उद्योग के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी यानी sunrise sector माना जाता है।
ओडिशा का यह निवेश अभियान संकेत देता है कि राज्य खाद्य प्रसंस्करण को रोजगार, निर्यात और ग्रामीण मूल्य संवर्धन के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करना चाहता है। आने वाले समय में इन प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन पर ही इस पहल की सफलता निर्भर करेगी।