कर्नाटक में GCC निवेश बढ़ाने की बड़ी पहल
कर्नाटक में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के विस्तार को तेज करने के लिए कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) और GoodWorks Group के बीच 6 अगस्त 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का लक्ष्य राज्य में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के नए GCC निवेश आकर्षित करना और 50 नए GCC स्थापित करना है।
GCC क्यों बन रहे हैं निवेश का नया केंद्र
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऐसे ऑफशोर यूनिट होते हैं, जहां तकनीक, वित्त, शोध, डेटा विश्लेषण और संचालन से जुड़े काम संभाले जाते हैं। भारत में इन केंद्रों की मांग लगातार बढ़ी है, क्योंकि यहां कुशल मानव संसाधन, मजबूत डिजिटल ढांचा और विकसित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और गुरुग्राम जैसे शहर GCC गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
कर्नाटक की तकनीकी ताकत और बेंगलुरु की भूमिका
कर्नाटक देश के सबसे मजबूत तकनीकी राज्यों में गिना जाता है और बेंगलुरु इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यह शहर सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन का बड़ा केंद्र है। यहां इंजीनियरिंग प्रतिभा, सॉफ्टवेयर सेवाओं और नवाचार आधारित उद्यमों की बड़ी मौजूदगी GCC के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। इसी कारण राज्य को वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य माना जाता है।
रोजगार, रियल एस्टेट और वैश्विक पहुंच
इस साझेदारी से 62,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसके साथ ही करीब 2,250 करोड़ रुपये के वार्षिक वेतन भुगतान और 12.5 लाख वर्ग फुट वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग पैदा होने की संभावना है। GoodWorks Group अपनी Sansovi GCC-as-a-Service प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियों को भारत में संचालन शुरू करने और उसे बढ़ाने में मदद करेगा। MoU के तहत उत्तर अमेरिका, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और मध्य पूर्व में भी संपर्क बढ़ाने की योजना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Global Capability Centres को कॉर्पोरेट भाषा में captive centres या global in-house centres भी कहा जाता है।
- KDEM कर्नाटक में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली राज्य-समर्थित पहल है।
- बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े आईटी और एंटरप्राइज सर्विसेज हब में से एक है।
- GCC विस्तार में अक्सर तकनीक, वित्त और सपोर्ट फंक्शंस के लिए बड़े कार्यालय स्थान की जरूरत होती है।
यह समझौता दिखाता है कि राज्य सरकार समर्थित नीति और निजी क्षेत्र की क्षमता मिलकर कर्नाटक को GCC निवेश का और बड़ा केंद्र बना सकती है। आने वाले समय में यह पहल रोजगार, शहरी वाणिज्यिक विकास और वैश्विक कॉर्पोरेट उपस्थिति, तीनों पर असर डाल सकती है।