आंध्र प्रदेश में 1600 मेगावाट तापीय बिजली खरीद की तैयारी
आंध्र प्रदेश में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए राज्य की वितरण कंपनियां 1,600 मेगावाट कोयला आधारित तापीय बिजली खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। आंध्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (APERC) ने 6 अगस्त 2026 को इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। यह खरीद प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए होगी और इसमें टैरिफ-आधारित DBFOO मॉडल अपनाया जाएगा।
क्यों अहम है यह फैसला
राज्य में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग 15,000 मेगावाट से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में तापीय बिजली को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह जरूरत के समय तुरंत उपलब्ध कराई जा सकती है। खासकर उन अवधियों में जब सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन कम होता है, तब यह क्षमता ग्रिड को स्थिर रखने में मदद करती है।
यह प्रस्ताव केवल तात्कालिक जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक संसाधन योजना से भी जुड़ा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की Resource Adequacy Plan के तहत आंध्र प्रदेश में FY 2035-36 तक 5,588 मेगावाट अतिरिक्त तापीय क्षमता जोड़ने की सिफारिश की गई है।
बोली प्रक्रिया कैसे चलेगी
इस खरीद में बिजली क्षेत्र की मानक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत Request for Qualification (RfQ), Request for Proposal (RfP) और Power Supply Agreement (PSA) जैसे दस्तावेजों का उपयोग होगा। ये दस्तावेज केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा टैरिफ-आधारित बिजली खरीद के लिए अधिसूचित किए जाते हैं।
DBFOO मॉडल का अर्थ है Design, Build, Finance, Own and Operate। यानी चयनित कंपनी परियोजना का डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन करेगी। यह व्यवस्था निजी भागीदारी के साथ बिजली उपलब्ध कराने का एक मानक ढांचा मानी जाती है।
नियामकीय मंजूरी तक पहुंचने की प्रक्रिया
इस प्रस्ताव की शुरुआत 27 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई राज्य समीक्षा बैठक से हुई थी। इसके बाद 11 जून 2026 को आंध्र प्रदेश पावर कोऑर्डिनेशन कमेटी (APPCC) ने इसे मंजूरी दी और फिर नियामकीय स्वीकृति के लिए APERC के पास भेजा गया। अब सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद वितरण कंपनियां प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- APERC का पूरा नाम Andhra Pradesh Electricity Regulatory Commission है, जो राज्य में बिजली क्षेत्र के नियमन से जुड़ा निकाय है।
- विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत टैरिफ निर्धारण प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से किया जा सकता है।
- DBFOO मॉडल का उपयोग बिजली परियोजनाओं में निजी निवेश और संचालन के लिए किया जाता है।
- कोयला आधारित तापीय बिजली को डिस्पैचेबल स्रोत माना जाता है, यानी इसे मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस फैसले से आंध्र प्रदेश की बिजली व्यवस्था को पीक डिमांड और कम नवीकरणीय उत्पादन वाले समय में अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम राज्य की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय माना जा रहा है।