तेलंगाना में दुर्लभ पांडुलिपियों और अभिलेखों के डिजिटलीकरण हेतु भारत-ईरान सहयोग
तेलंगाना के विरासत विभाग (Department of Heritage Telangana) ने 15 जून 2026 को दुर्लभ पांडुलिपियों, चित्रों, पुस्तकों और अभिलेखीय दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सूचीकरण के लिए नई दिल्ली स्थित ईरान सांस्कृतिक केंद्र के अंतर्गत नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक की सहायता से सुरक्षित रखना तथा भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
समझौते का दायरा
इस समझौते के अंतर्गत तेलंगाना के महत्वपूर्ण अभिलेखीय और सांस्कृतिक संग्रहों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा। परियोजना में लगभग 737 पांडुलिपियां, 3,091 चित्रकृतियां, 14,522 पुस्तकें और 101 दस्तावजात (Dastawazats) शामिल हैं। दस्तावजात ऐतिहासिक अभिलेखीय रिकॉर्ड होते हैं, जो प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।
बहुभाषी विरासत का संरक्षण
तेलंगाना के संग्रहों में फारसी, उर्दू, अरबी तथा अन्य भाषाओं में लिखित महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं। इन अभिलेखों में कई ऐसे ऐतिहासिक रिकॉर्ड शामिल हैं जो दक्षिण भारत के मध्यकालीन इतिहास, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर प्रकाश डालते हैं। डिजिटलीकरण के माध्यम से इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए अधिक सुलभ बनाया जाएगा।
निःशुल्क तकनीकी सहयोग
समझौते के अनुसार नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर के विशेषज्ञ डिजिटलीकरण, इंडेक्सिंग, कैटलॉगिंग, मरम्मत और संरक्षण का कार्य करेंगे। इस परियोजना का पूरा वित्तीय व्यय इस्लामी गणराज्य ईरान की सरकार वहन करेगी, जिससे तेलंगाना सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। यह सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
तेलंगाना राज्य अभिलेखागार एवं अनुसंधान संस्थान की भूमिका
हैदराबाद स्थित तेलंगाना राज्य अभिलेखागार एवं अनुसंधान संस्थान (TSARI) राज्य के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ भंडारों में से एक है। संस्थान में 4.3 करोड़ से अधिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत सामग्री शास्त्रीय फारसी और उर्दू भाषाओं में उपलब्ध है। इन अभिलेखों का इतिहास 1406 ईस्वी तक पहुंचता है और इनमें बहमनी, कुतुब शाही, आदिल शाही तथा मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।
पूर्व समझौता और संरक्षण प्रयास
इससे पहले 7 सितंबर 2022 को भी तेलंगाना राज्य अभिलेखागार एवं अनुसंधान संस्थान और नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर के बीच एक समझौता हुआ था। उस समझौते का उद्देश्य उर्दू और फारसी पांडुलिपियों तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों की मरम्मत, संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण करना था। वर्तमान समझौता उसी सहयोग को और व्यापक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ज्ञान भारतम् मिशन से जुड़ाव
तेलंगाना राज्य अभिलेखागार एवं अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ज्ञान भारतम् मिशन पहल के अंतर्गत भी कार्य कर रहा था। इस राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य देशभर में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना है, ताकि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखा जा सके।
संग्रह की दुर्लभ धरोहरें
इस परियोजना में कई अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक सामग्री शामिल है। इनमें फारसी भाषा में अनूदित रामायण और भागवत महापुराण, स्वर्ण-लेपित कागजों पर लिखी गई कुरान की आयतें, तथा लगभग 10.5 मीटर लंबा शाही स्क्रॉल शामिल हैं। इन अमूल्य धरोहरों का संरक्षण भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक संवाद का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
आधुनिक संरक्षण तकनीक
दुर्लभ दस्तावेजों और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए हर्बल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से संरक्षित सामग्री की आयु 200 वर्षों से अधिक तक बढ़ाई जा सकती है। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक संरक्षण विज्ञान का एक प्रभावी संयोजन माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तेलंगाना ने 15 जून 2026 को नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर के साथ समझौता किया।
- परियोजना में 737 पांडुलिपियां, 3,091 चित्र, 14,522 पुस्तकें और 101 दस्तावजात शामिल हैं।
- दस्तावजात (Dastawazats) ऐतिहासिक अभिलेखीय रिकॉर्ड होते हैं।
- तेलंगाना राज्य अभिलेखागार एवं अनुसंधान संस्थान में 4.3 करोड़ से अधिक दस्तावेज सुरक्षित हैं।
- लगभग 80 प्रतिशत अभिलेख फारसी और उर्दू भाषाओं में हैं।
- बहमनी, कुतुब शाही, आदिल शाही और मुगल राजवंशों से संबंधित अभिलेख यहां संरक्षित हैं।
- फारसी में रामायण और भागवत महापुराण इस संग्रह की प्रमुख दुर्लभ पांडुलिपियों में शामिल हैं।
- ज्ञान भारतम् मिशन का लक्ष्य देशभर में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना है।
तेलंगाना और ईरान के बीच यह सहयोग ऐतिहासिक दस्तावेजों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक डिजिटलीकरण तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सदियों पुरानी पांडुलिपियों, अभिलेखों और कलात्मक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे इतिहास, संस्कृति और शोध के क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।