तेलंगाना में ड्रोन से टीबी जांच के नमूने पहुंचाने की पहल से निदान हुआ तेज
भारत में क्षय रोग (टीबी) के निदान को तेज और सुलभ बनाने की दिशा में तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरि जिले में ड्रोन आधारित चिकित्सा परिवहन प्रणाली का सफल अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन एम्स बीबीनगर द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आई-ड्रोन (i-DRONE) कार्यक्रम के तहत किया गया। अध्ययन में दूरदराज के गांवों से टीबी जांच के लिए थूक (स्पुटम) के नमूनों को ड्रोन के माध्यम से परीक्षण केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था का मूल्यांकन किया गया। इसके तहत मरीजों के खर्च, जांच में लगने वाले समय और रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
टीबी जांच में ड्रोन तकनीक का उपयोग
भारत में टीबी की जांच सामान्यतः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर थूक के नमूने एकत्र कर उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं में परीक्षण के माध्यम से की जाती है। तेलंगाना के इस अध्ययन में ड्रोन का उपयोग दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों से स्पुटम नमूनों को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित परीक्षण केंद्रों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए किया गया। इस पूरी प्रणाली का संचालन एम्स बीबीनगर स्थित केंद्रीय कमांड सेंटर से किया गया, जिसने 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 60 उपकेंद्रों और चार टीबी इकाइयों के बीच ड्रोन संचालन का समन्वय किया।
समय और खर्च में उल्लेखनीय कमी
अध्ययन के अनुसार ड्रोन आधारित परिवहन लागू होने के बाद मरीजों का औसत जेब से होने वाला खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर) 9,451 रुपये से घटकर केवल 91 रुपये रह गया। वहीं टीबी निदान की औसत अवधि 15 दिनों से घटकर मात्र 5 दिन हो गई। ड्रोन व्यवस्था से पहले 92 प्रतिशत से अधिक मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए दो दिनों से अधिक इंतजार करना पड़ता था, जबकि ड्रोन प्रणाली लागू होने के बाद 76.3 प्रतिशत मरीजों को अगले ही दिन रिपोर्ट प्राप्त हो गई। इससे समय पर उपचार शुरू करने में भी बड़ी सहायता मिली।
आई-ड्रोन कार्यक्रम की विशेषताएं
आई-ड्रोन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) के माध्यम से चिकित्सा सामग्री और जैविक नमूनों का तेज एवं सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना है। 18 जनवरी 2025 को इस कार्यक्रम के अंतर्गत एक ड्रोन ने लगभग 55 किलोमीटर की दूरी केवल 20 मिनट में तय करते हुए गट्टुसिंगारम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रामन्नापेट क्षेत्रीय अस्पताल तक 11 स्पुटम नमूने पहुंचाए। वापसी उड़ानों में ड्रोन द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाओं की आपूर्ति भी की जाती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य में बढ़ती भूमिका
स्वास्थ्य सेवाओं में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां सड़क संपर्क सीमित है। जैविक नमूनों का शीघ्र परिवहन रोग की पुष्टि में लगने वाले समय को कम करता है और मरीजों के उपचार की शुरुआत में तेजी लाता है। तेलंगाना अध्ययन में रिपोर्टिंग समय और निदान में देरी को सेवा वितरण की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतकों के रूप में मापा गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक तकनीक ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एम्स बीबीनगर तेलंगाना में स्थित है और आई-ड्रोन परियोजना के समन्वय का केंद्रीय संस्थान है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ग्रामीण भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में मरीजों का पहला संपर्क केंद्र होते हैं।
- राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (National TB Elimination Programme) भारत में क्षय रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
- ड्रोन आधारित चिकित्सा लॉजिस्टिक्स का उपयोग जैविक नमूनों के परिवहन, दवाओं की आपूर्ति तथा दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को तेज बनाने के लिए किया जा रहा है।
तेलंगाना में ड्रोन आधारित टीबी नमूना परिवहन प्रणाली का यह अध्ययन स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे न केवल जांच की गति और सटीकता में सुधार हुआ है, बल्कि मरीजों के समय और आर्थिक बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई है। भविष्य में इस प्रकार की व्यवस्था देश के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।