जलवायु अनुसंधान में युवा वैज्ञानिकों को जोड़ने की पहल
पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने 11 अक्टूबर 2026 को मेघदूत सभागार में एपीएआरसी प्रारंभिक-कैरियर कार्यशाला आयोजित की। “द ईसीआर नेक्सस: आवाज़ों, उपकरणों और विज्ञान को समाज से जोड़ना” विषय पर हुई यह कार्यशाला युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए थी। इसे उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2026 की पूर्व-भूमिका के रूप में आयोजित किया गया।
युवा शोधकर्ताओं के लिए संवाद का मंच
कार्यशाला में भारत और अन्य देशों के लगभग 120 प्रारंभिक-कैरियर शोधकर्ताओं, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, संपादकों और पेशेवरों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य वायुमंडलीय और पृथ्वी विज्ञान के उभरते शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाना, कौशल विकसित करना और अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना था। एपीएआरसी महासभा से पहले प्रारंभिक-कैरियर शोधकर्ताओं के लिए ऐसा आयोजन हर चार वर्ष में किया जाता है।
आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव ने स्वागत संबोधन दिया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने ईएसटीआईसी 2026 की परिकल्पना और रणनीतिक उद्देश्यों पर बात की। इससे कार्यशाला को व्यापक वैज्ञानिक संवाद और नवाचार सम्मेलन से जोड़ने का अवसर मिला।
वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और जलवायु का अध्ययन
एपीएआरसी का पूरा नाम ‘एटमॉस्फेरिक प्रोसेसेज़ एंड देयर रोल इन क्लाइमेट’ है। यह विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी) की एक परियोजना है, जो जलवायु अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को समर्थन देता है। एपीएआरसी के तहत वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और जलवायु प्रणाली के साथ उनकी अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
कार्यशाला में मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के उपयोग पर मुख्य व्याख्यान दिया। इन विधियों से विशाल वायुमंडलीय आँकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है और मौसम तथा जलवायु संबंधी अनुसंधान में सहायता मिल सकती है।
आईआईटीएम की अनुसंधान भूमिका
आईआईटीएम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है। इसकी स्थापना 1962 में हुई और इसका मुख्यालय पुणे में है। संस्थान मौसम विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और जलवायु विज्ञान में अनुसंधान करता है। भारतीय मानसून, उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियाँ और वायुमंडलीय प्रक्रियाएँ इसके अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईआईटीएम की स्थापना 1962 में हुई; यह पुणे में स्थित है।
- आईआईटीएम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्थान है।
- एपीएआरसी, विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी) की परियोजना है।
- ईएसटीआईसी का पूरा नाम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन है।
यह कार्यशाला युवा शोधकर्ताओं को जलवायु और पृथ्वी विज्ञान के साझा प्रश्नों पर संवाद का अवसर देती है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए औजारों को मौसम और जलवायु अनुसंधान से जोड़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है।