चीन की नई AI तकनीक से बनेगा उर्वरक

चीन की नई AI तकनीक से बनेगा उर्वरक

चीन के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक नई इलेक्ट्रोकेमिकल तकनीक विकसित की है, जो नाइट्रेट युक्त अपशिष्ट जल को अमोनिया में बदल सकती है। इस अमोनिया का उपयोग उर्वरक उत्पादन में किया जाएगा। यह नई तकनीक पारंपरिक हैबर-बॉश प्रक्रिया की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करती है और सामान्य कमरे के तापमान पर काम करती है। इस उपलब्धि को रासायनिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।

AI आधारित उत्प्रेरक तकनीक

नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक विशेष ड्यूल-एटम कैटेलिस्ट विकसित किया गया है। ड्यूल-एटम कैटेलिस्ट में दो सक्रिय धातु परमाणु एक साथ कार्य करते हैं, जिससे रासायनिक प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी और नियंत्रित बनती है। यह तकनीक कृषि क्षेत्रों से बहने वाले पानी और औद्योगिक अपशिष्ट जल में मौजूद नाइट्रेट को अमोनिया में परिवर्तित करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस नई प्रक्रिया की कार्यक्षमता पहले की तकनीकों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।

नाइट्रेट से अमोनिया निर्माण

इस प्रक्रिया में अपशिष्ट जल में मौजूद नाइट्रेट आयनों को इलेक्ट्रोकेमिकल रिडक्शन के माध्यम से अमोनिया में बदला जाता है। अमोनिया नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों जैसे यूरिया और अमोनियम यौगिकों का मुख्य कच्चा पदार्थ है। इस तकनीक से एक ओर जल प्रदूषण कम करने में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर उर्वरक उत्पादन के लिए टिकाऊ संसाधन भी उपलब्ध होंगे। इससे कृषि क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।

हैबर-बॉश प्रक्रिया से अंतर

हैबर-बॉश प्रक्रिया 20वीं सदी की शुरुआत में विकसित की गई थी और आज भी औद्योगिक स्तर पर अमोनिया उत्पादन के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाती है। इस प्रक्रिया में उच्च तापमान और उच्च दबाव की आवश्यकता होती है, जिसके कारण ऊर्जा की भारी खपत होती है। इसके विपरीत नई चीनी तकनीक सामान्य तापमान पर काम करती है और ऊर्जा की आवश्यकता को काफी कम कर देती है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और हरित रसायन उद्योग को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

फॉस्फोरस पुनर्चक्रण पर शोध

चीन के शोधकर्ताओं ने फॉस्फोरस पुनर्चक्रण के क्षेत्र में भी नई तकनीक विकसित की है। इसमें सीवेज स्लज को विशेष हाइड्रोचार और कैल्शियम या मैग्नीशियम लवणों की सहायता से फॉस्फोरस उर्वरक में परिवर्तित किया जा रहा है। यह तकनीक भविष्य में अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अमोनिया का रासायनिक सूत्र NH3 होता है और यह रंगहीन गैस है।
  • नाइट्रेट प्रदूषण मुख्य रूप से कृषि अपवाह, उर्वरकों और औद्योगिक अपशिष्ट से उत्पन्न होता है।
  • हैबर-बॉश प्रक्रिया अमोनिया उत्पादन की पारंपरिक औद्योगिक तकनीक है।
  • जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी विश्व की प्रमुख रसायन विज्ञान शोध पत्रिकाओं में शामिल है।

चीन की यह नई AI आधारित तकनीक पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ उर्वरक उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे भविष्य में ऊर्जा की बचत, प्रदूषण नियंत्रण और हरित कृषि को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

Originally written on May 12, 2026 and last modified on May 12, 2026.

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