चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के संकेत खोजे

चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के संकेत खोजे

Indian Space Research Organisation यानी इसरो ने 27-28 मई 2026 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित ठंडे क्रेटरों में संभावित भूमिगत बर्फ के प्रमाण मिलने की घोषणा की। यह खोज चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से प्राप्त आंकड़ों और अहमदाबाद स्थित Physical Research Laboratory के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विश्लेषण पर आधारित है। यह अध्ययन भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशनों और संसाधन उपयोग की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चंद्रयान-2 और डीएफएसएआर तकनीक

चंद्रयान-2 मिशन में ड्यूल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार यानी DFSAR लगाया गया है। यह माइक्रोवेव इमेजिंग उपकरण चंद्रमा की सतह के नीचे तक अध्ययन करने में सक्षम है। DFSAR चंद्रमा का अध्ययन करने वाला पहला पूर्ण पोलारिमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार है, जो L-band और S-band दोनों आवृत्तियों पर कार्य करता है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक सतह के नीचे मौजूद बर्फ और अन्य पदार्थों के संकेतों का विश्लेषण कर सके।

दक्षिणी ध्रुव के क्रेटरों में बर्फ के संकेत

वैज्ञानिकों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थित Faustini crater के अंदर लगभग 1.1 किलोमीटर चौड़े एक छोटे क्रेटर में भूमिगत बर्फ के मजबूत संकेत मिले। अध्ययन मुख्य रूप से उन “दोहरे छायांकित क्रेटरों” पर केंद्रित था, जहां लंबे समय तक प्रत्यक्ष सूर्य प्रकाश नहीं पहुंचता। इन क्षेत्रों में तापमान अत्यंत कम बना रहता है, जिससे पानी की बर्फ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है।

रडार संकेत और वैज्ञानिक विश्लेषण

अध्ययन के दौरान जिन क्रेटरों में Circular Polarization Ratio एक से अधिक और Degree of Polarization 0.13 से कम पाया गया, उन्हें बर्फ की संभावित उपस्थिति से जोड़ा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार ये रडार संकेत “वॉल्यूमेट्रिक स्कैटरिंग” का संकेत देते हैं, जो बर्फयुक्त पदार्थों की पहचान में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तकनीक चंद्र सतह के नीचे छिपे संसाधनों का पता लगाने में उपयोगी साबित हो रही है।

अत्यधिक ठंड और जल बर्फ का संरक्षण

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के स्थायी छायांकित क्षेत्रों का तापमान लगभग 25 केल्विन यानी -248 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इतनी कम तापमान स्थिति जल बर्फ को करोड़ों वर्षों तक संरक्षित रखने में सक्षम मानी जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य के मानव मिशनों में यही बर्फ पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन के उत्पादन के लिए उपयोगी हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Indian Space Research Organisation भारत की अंतरिक्ष एजेंसी है।
  • DFSAR चंद्रयान-2 का रडार उपकरण है, जो L-band और S-band आवृत्तियों पर कार्य करता है।
  • Faustini crater चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित एक प्रमुख क्रेटर है।
  • चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के स्थायी छायांकित क्षेत्रों का तापमान लगभग 25 केल्विन रहता है।

चंद्रमा पर संभावित जल बर्फ की यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और मानव बस्तियों की संभावनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसरो की यह उपलब्धि चंद्र अनुसंधान और अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है।

Originally written on May 28, 2026 and last modified on May 28, 2026.

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