डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई में भारत की वैश्विक छलांग
भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। स्टेट ऑफ इंडियाज़ डिजिटल इकोनॉमी 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत एआई प्रदर्शन में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि डिजिटल अर्थव्यवस्था रैंकिंग में पांचवें स्थान पर रहा। यह उपलब्धि भारत के तेजी से विकसित होते डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीकी नवाचार क्षमता को दर्शाती है।
स्टेट ऑफ इंडियाज़ डिजिटल इकोनॉमी 2026 रिपोर्ट
यह रिपोर्ट 29 मई 2026 को आईसीआरआईईआर-प्रोसस सेंटर फॉर इंटरनेट एंड डिजिटल इकोनॉमी द्वारा जारी की गई। रिपोर्ट में एआई प्रदर्शन, डिजिटल व्यापार, प्रतिभा विकास और डिजिटल अपनाने जैसे विभिन्न संकेतकों के आधार पर देशों का मूल्यांकन किया गया। भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार करते हुए 2025 के आठवें स्थान से 2026 में पांचवें स्थान तक की छलांग लगाई। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे प्रमुख डिजिटल राष्ट्र रहे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की उपलब्धि
एआई प्रदर्शन के क्षेत्र में भारत ने चौथा स्थान प्राप्त किया और कई विकसित देशों जैसे जर्मनी, फ्रांस, जापान, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा को पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि देश में बढ़ते अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी कौशल का परिणाम मानी जा रही है। भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई प्रतिभा समूह भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
डिजिटल व्यापार का बढ़ता योगदान
भारत ने डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के क्षेत्र में लगभग 328 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार किया। इसमें सॉफ्टवेयर निर्यात, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य ऑनलाइन व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं। डिजिटली डिलीवर्ड ट्रेड आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जिसमें सेवाएं इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाई जाती हैं।
एआई प्रतिभा और वैश्विक उपयोगकर्ता आधार
वैश्विक स्तर पर एआई उपयोगकर्ताओं में विकासशील देशों की हिस्सेदारी लगभग 72 प्रतिशत रही। भारत और चीन मिलकर इस कुल संख्या का लगभग दो-पांचवां हिस्सा बनाते हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एआई इंडेक्स 2026 में उद्धृत एक लिंक्डइन अध्ययन के अनुसार भारत एआई कौशल प्रसार के मामले में विश्व में प्रथम स्थान पर रहा। वहीं 2019 से 2025 के बीच एआई प्रतिभा वृद्धि के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया।
प्रतिभा पलायन की चुनौती
हालांकि भारत ने एआई क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी प्रतिभा संरक्षण एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2025 में देश से एआई शोधकर्ताओं और आविष्कारकों का शुद्ध बहिर्गमन दर्ज किया गया। वैश्विक प्रतिभा अध्ययनों में इस सूचक का उपयोग विभिन्न देशों के बीच शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों की आवाजाही को मापने के लिए किया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी कंप्यूटर प्रणालियों को कहा जाता है जो सीखने, तर्क करने और पैटर्न पहचानने जैसे कार्य कर सकती हैं।
- एआई इंडेक्स स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़ा एक वार्षिक प्रकाशन है जो वैश्विक एआई रुझानों का अध्ययन करता है।
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई प्रतिभा केंद्र है।
- डिजिटल रूप से प्रदत्त व्यापार में सॉफ्टवेयर, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑनलाइन व्यावसायिक सेवाएं शामिल होती हैं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति देश के तकनीकी भविष्य की मजबूत नींव को दर्शाती है। हालांकि प्रतिभा पलायन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन नवाचार, डिजिटल व्यापार और कौशल विकास के क्षेत्र में हो रही प्रगति भारत को वैश्विक डिजिटल शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।