ओडिशा में भारत की पहली एडवांस्ड 3डी ग्लास सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने इंटेल और 3डी ग्लास सॉल्यूशंस के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है। 28 और 29 मई 2026 को हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत उन्नत ग्लास सब्सट्रेट निर्माण तकनीक को भारत में लाया जाएगा। यह परियोजना भुवनेश्वर के इंफो वैली क्षेत्र में स्थापित की जाएगी और देश के सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और ग्लास सब्सट्रेट का महत्व
सेमीकंडक्टर पैकेजिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से इंटीग्रेटेड सर्किट को सुरक्षित किया जाता है और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से जोड़ने योग्य बनाया जाता है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उच्च प्रदर्शन और अधिक क्षमता प्राप्त करने के लिए उन्नत पैकेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। ग्लास सब्सट्रेट उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग में विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि वे उच्च घनत्व वाले इंटरकनेक्शन और 3डी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन को संभव बनाते हैं। इससे छोटे आकार में अधिक शक्तिशाली और ऊर्जा-कुशल चिप्स विकसित किए जा सकते हैं।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत परियोजना
इस परियोजना को अगस्त 2025 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत मंजूरी प्रदान की गई थी। इसका क्रियान्वयन अमेरिका की 3डी ग्लास सॉल्यूशंस इंक. अपनी भारतीय सहायक कंपनी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से करेगी। यह परियोजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
निवेश, उत्पादन और सरकारी सहयोग
परियोजना की कुल लागत लगभग 1,943.53 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 799 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि राज्य सरकार लगभग 399.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सहयोग देगी। संयंत्र के पूर्ण संचालन के बाद प्रतिवर्ष लगभग 70,000 ग्लास सब्सट्रेट, 5 करोड़ असेंबल्ड यूनिट और लगभग 13,000 उन्नत 3डी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन मॉड्यूल का उत्पादन होने की उम्मीद है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा क्षेत्र में उपयोग
इस इकाई का प्रमुख फोकस उन्नत 3डी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन तकनीक होगा, जिसका उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रणालियों में किया जाएगा। व्यावसायिक उत्पादन अगस्त 2028 तक शुरू होने की संभावना है। इससे भारत में उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।
ओडिशा का उभरता सेमीकंडक्टर केंद्र
ओडिशा केवल इस परियोजना तक सीमित नहीं है। राज्य में भारत की पहली वाणिज्यिक कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई भी स्थापित की जा रही है। यह परियोजना सिक्ससेम प्राइवेट लिमिटेड और यूनाइटेड किंगडम की क्लास-एसआईसी वेफर फैब के सहयोग से विकसित की जाएगी, जिसका शिलान्यास जून 2026 में प्रस्तावित है। इन पहलों के माध्यम से ओडिशा भारत के प्रमुख सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की पहली एडवांस्ड 3डी ग्लास सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट भुवनेश्वर के इंफो वैली में स्थापित की जा रही है।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण को बढ़ावा देने की केंद्रीय योजना है।
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर में सिलिकॉन कार्बाइड और गैलियम नाइट्राइड जैसे पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
- ग्लास सब्सट्रेट उन्नत 3डी पैकेजिंग और उच्च घनत्व इंटरकनेक्शन तकनीक के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ओडिशा में स्थापित होने वाली यह परियोजना भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे उच्च तकनीक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।