गगनयान मिशन के लिए इसरो ने सफलतापूर्वक किया आईमैट-05 पैराशूट परीक्षण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 7 जुलाई 2026 को गगनयान मिशन के तहत इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट-05 (आईमैट-05) का सफलतापूर्वक संचालन किया। यह परीक्षण मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के ड्रॉप ज़ोन में किया गया। परीक्षण के दौरान डमी भार के साथ एक सिम्युलेटेड मेन पैराशूट असेंबली का उपयोग किया गया। यह परीक्षण गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
गगनयान मिशन और पैराशूट प्रणाली
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजना है। इस मिशन में क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी के लिए अत्याधुनिक डिसेलेरेशन प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली में कुल 10 पैराशूट शामिल हैं, जिन्हें चार अलग-अलग प्रकारों में विभाजित किया गया है। वायुमंडल में पुनः प्रवेश के बाद यही प्रणाली क्रू मॉड्यूल की गति को नियंत्रित करते हुए समुद्र में सुरक्षित स्प्लैशडाउन सुनिश्चित करती है।
आईमैट-05 परीक्षण की विशेषताएं
आईमैट-05, गगनयान मिशन के लिए आयोजित इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट श्रृंखला का पांचवां परीक्षण था। इस परीक्षण में भारतीय वायु सेना के आईएल-76 परिवहन विमान से लगभग 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से परीक्षण पेलोड को गिराया गया। इसका उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में पैराशूट प्रणाली के प्रदर्शन, मजबूती और विश्वसनीयता का मूल्यांकन करना था।
पैराशूट तैनाती की प्रक्रिया
परीक्षण के दौरान निर्धारित क्रम में सबसे पहले एक्सट्रैक्टर पैराशूट को तैनात किया गया। इसके बाद ड्रोग पैराशूट खुला, जिसने पेलोड की गति को नियंत्रित किया। अंत में मुख्य पैराशूट सक्रिय हुआ, जिसने पेलोड की अवतरण गति को सुरक्षित अंतिम वेग तक कम कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तविक मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर सके।
मिशन में विभिन्न एजेंसियों की भूमिका
इस महत्वपूर्ण परीक्षण में इसरो के साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। यह परीक्षण गगनयान के मानव रहित जी-1 मिशन से जुड़ा हुआ था। परीक्षण के दौरान मुख्य पैराशूट की संरचनात्मक मजबूती, डिजाइन क्षमता और अधिकतम संभावित भार की स्थिति में उसके प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। ऐसे परीक्षण मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है।
- गगनयान के क्रू मॉड्यूल की डिसेलेरेशन प्रणाली में कुल 10 पैराशूट शामिल हैं, जिन्हें चार प्रकारों में बांटा गया है।
- आईमैट-05 परीक्षण में भारतीय वायु सेना के आईएल-76 परिवहन विमान का उपयोग किया गया।
- इस परीक्षण में इसरो के साथ डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना ने भी भाग लिया।
गगनयान मिशन के लिए आईमैट-05 का सफल परीक्षण भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार के सुरक्षा परीक्षण भविष्य के मानव मिशनों की सफलता और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भारत का यह मिशन देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।