एफडीए ने स्तन कैंसर के लिए पहली प्रोटैक दवा ‘वेप्पानू’ को दी मंजूरी

एफडीए ने स्तन कैंसर के लिए पहली प्रोटैक दवा ‘वेप्पानू’ को दी मंजूरी

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 1 मई 2026 को वेपडेजेस्ट्रेंट (ब्रांड नाम वेप्पानू) को मंजूरी देकर स्तन कैंसर के उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। यह दवा विशेष रूप से उन वयस्क मरीजों के लिए स्वीकृत की गई है, जिन्हें एस्ट्रोजन रिसेप्टर-पॉजिटिव (ईआर-पॉजिटिव), एचईआर2-नेगेटिव और ईएसआर1-म्यूटेशन युक्त उन्नत या मेटास्टेटिक स्तन कैंसर है। इस दवा का विकास आर्विनास ऑपरेशंस इंक. और फाइजर इंक. ने संयुक्त रूप से किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया की पहली एफडीए-स्वीकृत प्रोटियोलिसिस टार्गेटिंग काइमेरा (प्रोटैक) दवा है।

किन मरीजों के लिए उपयोगी है यह दवा?

वेपडेजेस्ट्रेंट एक मौखिक (ओरल) दवा है, जिसे उन मरीजों के लिए मंजूरी दी गई है जिनकी बीमारी कम-से-कम एक बार एंडोक्राइन थेरेपी लेने के बाद भी बढ़ गई हो। इस उपचार का लाभ केवल उन मरीजों को मिलेगा जिनमें एफडीए-अधिकृत परीक्षण के माध्यम से ईएसआर1 जीन म्यूटेशन की पुष्टि हो चुकी हो। इससे उपचार को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बनाने में मदद मिलेगी।

कंपैनियन डायग्नोस्टिक की भूमिका

एफडीए ने इसी दिन गार्डेंट360 सीडीएक्स को भी कंपैनियन डायग्नोस्टिक के रूप में मंजूरी दी। यह एक विशेष प्रयोगशाला परीक्षण है, जिसका उपयोग स्तन कैंसर के मरीजों में ईएसआर1 म्यूटेशन की पहचान करने के लिए किया जाएगा। ऐसे परीक्षण यह सुनिश्चित करते हैं कि सही मरीज को सही दवा उपलब्ध कराई जाए, जिससे उपचार की प्रभावशीलता बढ़ सके।

क्लिनिकल ट्रायल में मिले उत्साहजनक परिणाम

वेपडेजेस्ट्रेंट की मंजूरी फेज-3 वेरिटैक-2 क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर दी गई। इस अध्ययन में ईएसआर1-म्यूटेशन वाले मरीजों में इस दवा ने बेहतर परिणाम दिए। मरीजों में मध्य प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल 5.0 महीने दर्ज किया गया, जबकि मौजूदा मानक दवा फुल्वेस्ट्रेंट के साथ यह केवल 2.1 महीने था। इसी तरह ऑब्जेक्टिव रिस्पॉन्स रेट 19 प्रतिशत रहा, जबकि फुल्वेस्ट्रेंट समूह में यह केवल 4 प्रतिशत था। ये परिणाम दर्शाते हैं कि नई दवा रोग की प्रगति को अधिक समय तक नियंत्रित रखने में सक्षम हो सकती है।

खुराक और सुरक्षा संबंधी जानकारी

वेपडेजेस्ट्रेंट की अनुशंसित खुराक 200 मिलीग्राम प्रतिदिन एक बार भोजन के साथ लेने की है। उपचार तब तक जारी रखा जाता है जब तक बीमारी बढ़ न जाए या दवा के दुष्प्रभाव असहनीय न हो जाएँ। सुरक्षा संबंधी चेतावनियों में क्यूटीसी अंतराल का बढ़ना तथा भ्रूण-विषाक्तता शामिल हैं, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी में ही इसका उपयोग किया जाना चाहिए। एफडीए ने इस दवा के आवेदन को अपने निर्धारित लक्ष्य समय से एक माह पहले असेसमेंट एड प्रक्रिया के माध्यम से मंजूरी प्रदान की।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रोटैक (प्रोटियोलिसिस टार्गेटिंग काइमेरा) ऐसी दवाओं का वर्ग है जो शरीर में हानिकारक प्रोटीन को नष्ट करने के लिए विकसित किया जाता है।
  • ईएसआर1 म्यूटेशन हार्मोन रिसेप्टर-पॉजिटिव स्तन कैंसर में एंडोक्राइन थेरेपी के प्रति प्रतिरोध विकसित होने से जुड़ा माना जाता है।
  • कंपैनियन डायग्नोस्टिक ऐसे विशेष परीक्षण होते हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि कोई मरीज किसी विशेष दवा से लाभ उठा सकेगा या नहीं।
  • मेटास्टेटिक स्तन कैंसर वह अवस्था है जिसमें कैंसर स्तन से शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है।

वेपडेजेस्ट्रेंट की मंजूरी कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नई दिशा का संकेत देती है। प्रोटैक तकनीक पर आधारित यह दवा न केवल लक्षित उपचार की अवधारणा को मजबूत करती है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है जिनमें पारंपरिक हार्मोनल उपचार प्रभावी नहीं रह गया था। भविष्य में इस तकनीक पर आधारित अन्य दवाओं के विकास से कैंसर चिकित्सा में और भी महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।

Originally written on July 8, 2026 and last modified on July 8, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *