सीएसआईआर-एनएएल ने सारस एमके-II विमान का डिजाइन चरण पूरा किया
भारत के स्वदेशी विमानन क्षेत्र को नई मजबूती देते हुए बेंगलुरु स्थित सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज (सीएसआईआर-एनएएल) ने 8 जुलाई 2026 को सारस एमके-II (Saras MkII) हल्के परिवहन विमान के डिजाइन चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। यह 19 सीटों वाला स्वदेशी विमान विशेष रूप से छोटे हवाई अड्डों और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को भारत की आत्मनिर्भर विमानन क्षमता को बढ़ाने और क्षेत्रीय परिवहन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सारस एमके-II की प्रमुख विशेषताएं
सारस एमके-II एक ट्विन-टर्बोप्रॉप हल्का परिवहन विमान है, जिसे सीएसआईआर-एनएएल द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह विमान कम दूरी की नागरिक हवाई सेवाओं और छोटे रनवे वाले हवाई अड्डों से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी 19 यात्रियों की क्षमता इसे क्षेत्रीय संपर्क के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाती है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों तक हवाई सेवाओं का विस्तार संभव हो सकेगा।
आधुनिक तकनीक से लैस विमान
सारस एमके-II में आधुनिक विमानन तकनीकों का समावेश किया गया है। इसमें प्रेसराइज्ड केबिन, डिजिटल एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट, ऑटोपायलट और कमांड-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल जैसी उन्नत प्रणालियां शामिल हैं। ये तकनीकें विमान को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और संचालन में सक्षम बनाती हैं। आधुनिक कॉकपिट और उन्नत फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के कारण यह विमान नवीन पीढ़ी के हल्के परिवहन विमानों की श्रेणी में शामिल होता है।
निर्माण और औद्योगिक साझेदारी
डिजाइन चरण पूरा होने के बाद अब सीएसआईआर-एनएएल का ध्यान प्रोटोटाइप निर्माण और बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी पर केंद्रित है। इस परियोजना में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) धातु से जुड़े प्रमुख पुर्जों के निर्माण में सहयोग कर रही है। इसके अलावा अन्य औद्योगिक साझेदारों को भी उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने की योजना बनाई गई है, जिससे भविष्य में विमान का व्यावसायिक निर्माण तेजी से किया जा सके।
परीक्षण उड़ान और संभावित उपयोग
सारस एमके-II की पहली परीक्षण उड़ान दिसंबर 2027 तक किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सफल परीक्षणों के बाद इस विमान का उपयोग क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। भारतीय वायु सेना ने भी इस विमान में रुचि दिखाई है और सफल परीक्षणों के बाद प्रारंभिक रूप से कम से कम 15 विमानों की आवश्यकता का अनुमान व्यक्त किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्लेटफॉर्म नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीएसआईआर-एनएएल का पूरा नाम काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च–नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज है।
- बेंगलुरु, सीएसआईआर-एनएएल का मुख्यालय होने के साथ भारत का प्रमुख एयरोस्पेस केंद्र भी है।
- ‘उड़ान’ भारत सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
- भारतीय वायु सेना ने सफल परीक्षणों के बाद सारस एमके-II के कम से कम 15 विमानों की प्रारंभिक आवश्यकता जताई है।
सारस एमके-II का डिजाइन चरण पूरा होना भारत के स्वदेशी विमान निर्माण कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक तकनीक, क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत की सोच के अनुरूप विकसित यह विमान भविष्य में देश के नागरिक एवं रक्षा विमानन क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।