गगनयान मिशन के लिए इसरो ने क्रू मॉड्यूल की तीन महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए

गगनयान मिशन के लिए इसरो ने क्रू मॉड्यूल की तीन महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 12 और 13 जुलाई 2026 को गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल से जुड़े तीन महत्वपूर्ण क्वालिफिकेशन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है और इन परीक्षणों का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा तथा मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना था। परीक्षणों में समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग के बाद कैप्सूल को सीधा करने की प्रणाली, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के बीच अलगाव तंत्र तथा एपेक्स कवर अलग होने के दौरान संरचनात्मक मजबूती का मूल्यांकन किया गया।

क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग सिस्टम का फ्लोट इन्फ्लेशन परीक्षण

पहला परीक्षण क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग सिस्टम (सीएमयूएस) का फ्लोट इन्फ्लेशन टेस्ट था। यह प्रणाली समुद्र में स्प्लैशडाउन के बाद यदि क्रू कैप्सूल उल्टी स्थिति में आ जाए, तो उसे स्वतः सीधा करने का कार्य करती है। सीएमयूएस में कोल्ड-गैस तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे फ्लोट तेजी से फुलते हैं और कैप्सूल को स्थिर एवं सुरक्षित स्थिति में लाते हैं। यह प्रणाली मानव मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्रू मॉड्यूल–सर्विस मॉड्यूल कनेक्ट एवं डिस्कनेक्ट प्रणाली का परीक्षण

दूसरा परीक्षण क्रू मॉड्यूल–सर्विस मॉड्यूल कनेक्ट एंड डिस्कनेक्ट सिस्टम (सीएस-सीडीएस) का अंबिलिकल सेपरेशन टेस्ट था। इस परीक्षण में सीएसयू-2 अंबिलिकल को एक सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग किया गया। इसके साथ ही क्रू मॉड्यूल पैनल और उससे जुड़े इंटरफेस की संरचनात्मक स्थिरता का भी परीक्षण किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तविक उड़ान के दौरान मॉड्यूलों का अलगाव सुरक्षित और सुचारु रूप से हो सके।

एपेक्स कवर सेपरेशन के दौरान संरचनात्मक मजबूती की जांच

तीसरा परीक्षण क्रू मॉड्यूल स्ट्रक्चरल क्वालिफिकेशन टेस्ट था, जिसमें एपेक्स कवर अलग होने के दौरान उत्पन्न होने वाले भार का मूल्यांकन किया गया। एपेक्स कवर पैराशूटों की सुरक्षा करता है और निर्धारित समय पर अलग होकर पैराशूट को खुलने की अनुमति देता है। इस परीक्षण के दौरान इसरो ने क्रू मॉड्यूल पर वास्तविक उड़ान में अनुमानित भार की तुलना में लगभग 1.75 गुना अधिक भार लगाया। परीक्षण के परिणामों में मॉड्यूल पर मापे गए तनाव और विकृति निर्धारित डिजाइन सीमाओं के भीतर रहे, जिससे इसकी संरचनात्मक मजबूती की पुष्टि हुई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है।
  • सीएमयूएस (Crew Module Up-righting System) समुद्र में उतरने के बाद क्रू कैप्सूल को सीधा करने वाली प्रणाली है।
  • सीएस-सीडीएस (Crew Module–Service Module Connect & Disconnect System) क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के सुरक्षित अलगाव के लिए विकसित किया गया है।
  • एपेक्स कवर उड़ान के दौरान पैराशूटों की सुरक्षा करता है और सही समय पर अलग होकर उन्हें खुलने की अनुमति देता है।

गगनयान मिशन से जुड़े इन तीन सफल परीक्षणों ने इसरो की मानव अंतरिक्ष उड़ान तैयारियों को नई मजबूती प्रदान की है। इन परीक्षणों से यह सुनिश्चित हुआ है कि क्रू मॉड्यूल विभिन्न महत्वपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षित और विश्वसनीय ढंग से कार्य कर सकता है। आने वाले समय में यह मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Originally written on July 13, 2026 and last modified on July 13, 2026.

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