लद्दाख के पुगा वैली में ओएनजीसी ने पूरी की दूसरी भू-तापीय कुएं की ड्रिलिंग
भारत स्वच्छ और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुगा वैली में अपने दूसरे भू-तापीय (जियोथर्मल) कुएं Puga-OEC-GT#03 की ड्रिलिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। ओएनजीसी एनर्जी सेंटर द्वारा लगभग 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित इस कुएं को 1,000 मीटर की गहराई तक केवल एक महीने में ड्रिल किया गया। यह उपलब्धि भारत के पहले 1 मेगावाट पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भू-तापीय ऊर्जा क्या है?
भू-तापीय ऊर्जा पृथ्वी के आंतरिक भाग में मौजूद प्राकृतिक ऊष्मा से प्राप्त होने वाली ऊर्जा है। इस ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन के साथ-साथ प्रत्यक्ष ताप आपूर्ति के लिए भी किया जाता है। भू-तापीय बिजली संयंत्र भूमिगत जल या भाप के प्राकृतिक भंडार का उपयोग करते हैं। चूंकि पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा लगातार उपलब्ध रहती है, इसलिए इसे नवीकरणीय ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत माना जाता है और इससे चौबीसों घंटे बिजली उत्पादन संभव होता है।
पुगा वैली क्यों है खास?
लद्दाख की पुगा वैली भारत के प्रमुख भू-तापीय क्षेत्रों में से एक है। यहां किए गए जियोथर्मोमेट्रिक अध्ययनों से पता चला है कि भूमिगत तापमान 240 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकता है, जो व्यावसायिक स्तर पर भू-तापीय बिजली उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह क्षेत्र प्राकृतिक गर्म जलस्रोतों और अन्य भू-तापीय गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिससे इसकी ऊर्जा क्षमता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
परियोजना की प्रगति और महत्व
Puga-OEC-GT#03 की ड्रिलिंग लगभग एक महीने में पूरी की गई, जो पहले अभियान की तुलना में समय और लागत दोनों के लिहाज से बेहतर रही। यह कुआं भारत के पहले 1 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले पायलट भू-तापीय बिजली संयंत्र को समर्थन देगा। परियोजना के परीक्षण, मूल्यांकन और कमीशनिंग का कार्य वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रस्तावित है। सफल होने पर यह परियोजना देश में भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है और विशेष रूप से लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
संस्थागत और प्रशासनिक पहलू
ओएनजीसी एनर्जी सेंटर, ओएनजीसी का अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रभाग है, जो इस परियोजना का संचालन कर रहा है। मई 2026 में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस परियोजना के लिए ओएनजीसी के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी थी। इससे परियोजना को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक प्रशासनिक समर्थन मिला।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ओएनजीसी (Oil and Natural Gas Corporation) भारत का एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- भू-तापीय ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत माना जाता है क्योंकि पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा लगातार उपलब्ध रहती है।
- भारत में लद्दाख के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में भी भू-तापीय संसाधनों की पहचान की गई है।
- पुगा वैली में प्रस्तावित पायलट भू-तापीय बिजली संयंत्र की क्षमता 1 मेगावाट (1 MWe) होगी।
लद्दाख की पुगा वैली में ओएनजीसी की यह उपलब्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यदि पायलट परियोजना सफल रहती है, तो देश में भू-तापीय ऊर्जा के व्यापक उपयोग का मार्ग खुलेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल एवं निरंतर बिजली उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।