केरल अब ‘केरलम’: राज्य नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी

केरल अब ‘केरलम’: राज्य नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी

केरल का आधिकारिक नाम अब केरलम हो गया है। यह बदलाव The Kerala (Alteration of Name) Act, 2026 के जरिए लागू हुआ, जिसके तहत भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में राज्य के नाम को संशोधित किया गया। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि किसी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद के माध्यम से पूरी होती है।

संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नाम परिवर्तन

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 नए राज्यों के गठन के साथ-साथ मौजूदा राज्यों के नाम, क्षेत्रफल और सीमाओं में बदलाव की अनुमति देता है। किसी राज्य का नाम बदलने के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य विधानसभा से राय ली जाती है, लेकिन संसद उस राय से बंधी नहीं होती। इसके बाद संसद विधेयक पारित करती है और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर कानून लागू होता है।

केरल के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। यह बदलाव किसी संविधान संशोधन के बजाय सामान्य विधायी प्रक्रिया से हुआ, क्योंकि राज्य का नाम बदलना अनुच्छेद 3 के दायरे में आता है।

केरल से केरलम तक का विधायी सफर

इस नाम परिवर्तन की शुरुआत केंद्र सरकार की मंजूरी से हुई। 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद जुलाई 2026 में केरल विधानसभा ने मसौदा प्रस्ताव स्वीकार किया।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 पेश किया। लोकसभा ने इसे 11 अगस्त को और राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को पारित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 14 अगस्त 2026 को स्वीकृति दी, जिसके बाद यह कानून The Kerala (Alteration of Name) Act, 2026 के रूप में अधिसूचित हुआ।

अधिसूचना और आधिकारिक प्रभाव

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 अगस्त 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर उसी दिन को कानून के लागू होने की तारीख घोषित किया। इसके साथ ही राज्य का आधिकारिक नाम केरलम हो गया। यह परिवर्तन संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज राज्यों की सूची में संशोधन के रूप में दर्ज किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के गठन, नाम परिवर्तन और सीमाओं में बदलाव का अधिकार देता है।
  • पहली अनुसूची में भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम दर्ज होते हैं।
  • राज्य का नाम बदलने के लिए राष्ट्रपति द्वारा राज्य विधानसभा से राय लेना अनिवार्य है।
  • राज्य का नाम बदलना अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं, बल्कि संसद की विधायी प्रक्रिया से होता है।

केरलम नाम परिवर्तन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा कदम है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय संघीय ढांचे में राज्यों के नाम और पहचान से जुड़े निर्णय संविधान में तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जाते हैं।

Originally written on August 26, 2026 and last modified on August 26, 2026.

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