केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹14,114 करोड़ की दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को दी मंजूरी
1 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के सड़क अवसंरचना नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से कुल ₹14,114.81 करोड़ की लागत वाली दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की। इनमें दिल्ली में एक अत्याधुनिक छह-लेन सड़क सुरंग तथा उत्तर प्रदेश में 117.7 किलोमीटर लंबा एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड राजमार्ग शामिल है। इन परियोजनाओं से यातायात सुगम होगा, यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
दिल्ली में छह-लेन सड़क सुरंग परियोजना
दिल्ली की पहली परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-148एई (NH-148AE) पर 8.1 किलोमीटर लंबी छह-लेन सड़क सुरंग के निर्माण से संबंधित है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹6,969.67 करोड़ है। यह सुरंग द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी, जिससे गुरुग्राम, द्वारका और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर आने-जाने वाले वाहनों को बड़ी सुविधा मिलेगी। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत लगभग पाँच वर्षों में पूरा किया जाएगा। सुरंग का 3.14 किलोमीटर लंबा ट्विन-ट्यूब हिस्सा दक्षिणी रिज वन क्षेत्र के नीचे से गुजरेगा। इस भाग के निर्माण में टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे सतह पर पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा और निर्माण कार्य अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
कानपुर–कबरई ग्रीनफील्ड राजमार्ग
दूसरी परियोजना उत्तर प्रदेश में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर–कबरई ग्रीनफील्ड एक्सेस-नियंत्रित राजमार्ग के निर्माण से संबंधित है। इस चार या छह-लेन राजमार्ग की अनुमानित लागत ₹7,145.14 करोड़ है। यह मार्ग भोपाल–कानपुर आर्थिक गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इस परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) टोल मॉडल के तहत किया जाएगा। राजमार्ग बनने के बाद कानपुर और कबरई के बीच यात्रा का समय लगभग साढ़े तीन घंटे से घटकर केवल डेढ़ घंटे रह जाने की संभावना है, जिससे व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय संपर्क को नई गति मिलेगी।
रोजगार और आर्थिक लाभ
दोनों परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। दिल्ली सुरंग परियोजना से लगभग 7.54 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष तथा 9.80 लाख व्यक्ति-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। वहीं, कानपुर–कबरई ग्रीनफील्ड राजमार्ग परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोजगार उपलब्ध होने की संभावना है। इन परियोजनाओं से परिवहन लागत में कमी आएगी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) भारत में राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अपनाया जाने वाला सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल है।
- बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) अवसंरचना विकास का एक रियायत आधारित मॉडल है, जिसमें निजी कंपनी निर्माण, संचालन और रखरखाव करती है।
- टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का उपयोग भूमिगत सुरंग निर्माण में सतही क्षति को कम करने के लिए किया जाता है।
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान भारत में एकीकृत अवसंरचना विकास और बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की राष्ट्रीय योजना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ये दोनों राजमार्ग परियोजनाएँ भारत की आधुनिक परिवहन अवसंरचना को नई मजबूती प्रदान करेंगी। बेहतर सड़क संपर्क, कम यात्रा समय, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के माध्यम से ये परियोजनाएँ देश के समग्र विकास तथा लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।