कृषि में नाइट्रोजन उर्वरक नीति को नई दिशा

कृषि में नाइट्रोजन उर्वरक नीति को नई दिशा

भारत ने कृषि में अनहाइड्रस अमोनिया के निर्माण और उपयोग को तीन वर्ष की अवधि के लिए मंजूरी दी है। यह फैसला नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों की उपलब्धता, आयात निर्भरता और वैकल्पिक उर्वरक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अनहाइड्रस अमोनिया में 82% नाइट्रोजन होती है और इसे सीधे नाइट्रोजन स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अनहाइड्रस अमोनिया क्या है और यह कैसे काम करता है

अनहाइड्रस अमोनिया एक गैसीय उर्वरक है, जिसे दबाव में संग्रहित किया जाता है और मिट्टी की सतह के नीचे इंजेक्ट किया जाता है। इसका उपयोग सामान्य उर्वरकों की तुलना में अधिक तकनीकी प्रक्रिया मांगता है, क्योंकि इसके लिए विशेष उपकरण, सीलबंद भंडारण व्यवस्था और प्रशिक्षित हैंडलिंग की जरूरत होती है। गलत तरीके से उपयोग करने पर यह जलन और सांस से जुड़ा खतरा पैदा कर सकता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह उर्वरक नाइट्रोजन की उच्च सांद्रता के कारण प्रभावी है, लेकिन इसकी सुरक्षित आपूर्ति और उपयोग के लिए मजबूत ढांचे की आवश्यकता होगी।

भारत की उर्वरक जरूरत और आयात पर निर्भरता

भारत हर साल लगभग 3 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन करता है, लेकिन घरेलू मांग पूरी करने के लिए करीब 1 करोड़ टन का आयात भी करना पड़ता है। यूरिया अब भी देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन उर्वरक है, क्योंकि यह सब्सिडी वाला और उपयोग में आसान है।यूरिया में लगभग 46% नाइट्रोजन होती है, जबकि अनहाइड्रस अमोनिया में यह मात्रा 82% तक पहुंचती है। इसी वजह से इसे सबसे अधिक सघन नाइट्रोजन उर्वरकों में गिना जाता है। सरकार की नई मंजूरी ऐसे समय आई है जब उर्वरक नीति में लागत, उपलब्धता और आयात बोझ को कम करने की कोशिशें तेज हैं।

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन यूरिया की दिशा में कदम

केंद्र सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत हर साल 7.24 लाख मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की खरीद की योजना बना रही है, ताकि ग्रीन यूरिया उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। इसके लिए उर्वरक विभाग ने ग्रीन यूरिया संयंत्रों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है और उद्योग जगत के साथ नोएडा में पूर्व-ईओआई बैठक भी की गई।ग्रीन अमोनिया की खरीद के लिए एक अंतर सब्सिडी मॉडल प्रस्तावित किया गया है, जिसमें सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया बाजार-आधारित ग्रे अमोनिया कीमतों पर आपूर्ति करेगा और कीमत के अंतर की भरपाई उर्वरक विभाग करेगा। यह व्यवस्था स्वच्छ ऊर्जा और उर्वरक उत्पादन को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूरिया में लगभग 46% नाइट्रोजन होती है।
  • अनहाइड्रस अमोनिया में 82% नाइट्रोजन होती है और यह अत्यधिक सघन नाइट्रोजन उर्वरक है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत सरकार की स्वच्छ ऊर्जा पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों को बढ़ावा देना है।
  • सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।

इस फैसले से भारत की उर्वरक नीति में तकनीकी विविधता बढ़ने की संभावना है। साथ ही, ग्रीन अमोनिया और वैकल्पिक उर्वरकों की दिशा में उठाए जा रहे कदम आने वाले वर्षों में कृषि लागत और आपूर्ति व्यवस्था पर असर डाल सकते हैं।

Originally written on July 27, 2026 and last modified on July 27, 2026.

1 Comment

  1. ashok kumar

    July 28, 2026 at 9:36 am

    Use of nitrogen in agriculture sector sale according to land of farmers cultivation by him .Not single bag extra give to farmers for agriculture.

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