आरकेवीवाई में महाराष्ट्र ने बनाई बढ़त, कृषि योजनाओं की फंड-उपयोगिता पर फोकस
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत महाराष्ट्र ने पहली किस्त का बड़ा हिस्सा खर्च कर दूसरी किस्त पाने की पात्रता हासिल कर ली है। राज्य ने पहली किस्त में जारी लगभग 335 करोड़ रुपये में से करीब 260 करोड़ रुपये का उपयोग किया, जो 75 प्रतिशत उपयोगिता मानक से अधिक है। यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब केंद्र राज्यों से कृषि योजनाओं में समयबद्ध खर्च और बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दे रहा है।
आरकेवीवाई क्यों महत्वपूर्ण है
आरकेवीवाई की शुरुआत राज्यों को अपनी कृषि प्राथमिकताओं के अनुसार परियोजनाएं तैयार करने और लचीले तरीके से धन उपयोग करने की सुविधा देने के लिए की गई थी। वर्तमान वित्तीय ढांचे में यह योजना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के रूप में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कृषि जोखिम कम करना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और कृषि-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
महाराष्ट्र की प्रगति और खर्च के क्षेत्र
महाराष्ट्र के मामले की समीक्षा के दौरान केंद्र ने डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, बीज, तिलहन और कृषि वानिकी जैसे घटकों में खर्च तेज करने की सलाह दी। यह संकेत देता है कि केवल राशि जारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समय पर और लक्षित उपयोग भी जरूरी है। इसी आधार पर राज्यों को अगली किस्तें जारी की जाती हैं।
आरकेवीवाई-रफ्तार और फंडिंग का ढांचा
आरकेवीवाई-रफ्तार दिशानिर्देशों को 2015-16 से पुनर्गठित किया गया था, ताकि किसानों के प्रयासों को मजबूती मिले और कृषि व्यवसाय से जुड़े नवाचारों को समर्थन मिल सके। इस योजना में सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 है। उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलती है।20 नवंबर 2024 को जारी परिचालन दिशानिर्देशों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवंटन के मानदंड भी तय किए गए हैं। इनमें असिंचित क्षेत्र, छोटे और सीमांत किसान, तथा कृषि में राज्य का सकल मूल्य वर्धन जैसे संकेतक शामिल हैं। 2024-25 के लिए इस योजना के तहत 7553.00 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जबकि 25 नवंबर 2024 तक 3075.26 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आरकेवीवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को समर्थन देती है।
- आरकेवीवाई-रफ्तार में सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य फंडिंग अनुपात 60:40 है।
- उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को इस योजना में 90:10 अनुपात से सहायता मिलती है।
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरकेवीवाई-रफ्तार के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण का प्रावधान है।
योजना के तहत किस्तें तभी आगे बढ़ती हैं जब राज्य तय मानकों के अनुसार धन का उपयोग करें। महाराष्ट्र की ताजा प्रगति इसी व्यवस्था की व्यावहारिक मिसाल है, जिसमें फंड उपयोगिता और योजना अनुपालन दोनों को बराबर महत्व दिया गया है।