ओडिशा और झारखंड में दो रेल मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 15 जुलाई 2026 को रेल मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें ओडिशा की पारादीप–हरिदासपुर रेल लाइन का दोहरीकरण और राजखरसावां–डांगोआपोसी मार्ग पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड के खनिज तथा औद्योगिक क्षेत्रों की रेल क्षमता बढ़ने के साथ माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
परियोजनाओं की लागत और दायरा
दोनों रेल परियोजनाओं की संयुक्त अनुमानित लागत लगभग 3,907 करोड़ रुपये है। इनके पूरा होने से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन क्षमता जुड़ेगी। ये परियोजनाएं ओडिशा और झारखंड के कुल चार जिलों को कवर करेंगी। परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना के माध्यम से रेल, सड़क, बंदरगाह और औद्योगिक केंद्रों के बीच बहु-माध्यम संपर्क तथा रसद दक्षता को मजबूत करना है। दोनों परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पारादीप–हरिदासपुर और राजखरसावां–डांगोआपोसी मार्ग
पारादीप–हरिदासपुर रेल गलियारा ओडिशा में स्थित है और पारादीप बंदरगाह को राज्य के आंतरिक क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस मार्ग के दोहरीकरण से ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ेगी और व्यस्त रेलखंड पर भीड़ कम होगी। राजखरसावां–डांगोआपोसी मार्ग ओडिशा और झारखंड के खनिज संपन्न क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर चौथी लाइन के निर्माण से यात्री और मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारु होगा। अतिरिक्त लाइन क्षमता से रेलवे की परिचालन दक्षता, सेवा विश्वसनीयता और समयबद्धता में सुधार होने की संभावना है।
माल ढुलाई क्षमता को मिलेगा बढ़ावा
क्षमता विस्तार के बाद इन रेल मार्गों पर लगभग 44 मिलियन टन प्रतिवर्ष अतिरिक्त माल परिवहन संभव हो सकेगा। इन मार्गों से मुख्य रूप से कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी भारी वस्तुओं की ढुलाई की जाती है। रेलवे परियोजनाएं खनिज उत्पादक क्षेत्रों को बंदरगाहों, इस्पात संयंत्रों, औद्योगिक इकाइयों और उपभोग केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ेंगी। इससे सड़क मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और देश की कुल रसद लागत में कमी लाने में सहायता मिलेगी।
गांवों और पर्यटन स्थलों की बेहतर कनेक्टिविटी
इन परियोजनाओं से लगभग 1,526 गांवों और करीब 14 लाख लोगों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने का अनुमान है। स्थानीय निवासियों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। परियोजनाओं से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु पहाड़ियों जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्रीय पर्यटन, स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
पर्यावरण और ऊर्जा संबंधी लाभ
रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है। इन परियोजनाओं के कारण माल ढुलाई में सड़क वाहनों पर निर्भरता कम होने से प्रतिवर्ष करीब 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त लगभग 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की संभावना है। यह कमी लगभग एक करोड़ पेड़ लगाने से होने वाले पर्यावरणीय लाभ के बराबर मानी गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति प्रमुख आर्थिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की समिति है।
- रेल लाइन के दोहरीकरण का अर्थ एकल रेल मार्ग के समानांतर दूसरी लाइन का निर्माण करना है।
- मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई या उत्पादन की वार्षिक क्षमता मापने की इकाई है।
- मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ती है और ट्रेनों की प्रतीक्षा अवधि कम होती है।
पारादीप–हरिदासपुर और राजखरसावां–डांगोआपोसी रेल परियोजनाएं पूर्वी भारत के खनिज, औद्योगिक और बंदरगाह आधारित परिवहन तंत्र को मजबूत करेंगी। अतिरिक्त रेल क्षमता से माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ईंधन की बचत तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। ये परियोजनाएं ओडिशा और झारखंड के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।