एसएचई-लीप्स: ग्रामीण महिलाओं के उद्यम और आजीविका को डिजिटल शक्ति देने वाला नया मंच
ग्रामीण भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 29 जून 2026 को एसएचई-लीप्स (SHE-LEAPS – Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। इसका शुभारंभ नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान किया गया, जिसकी थीम “ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” थी। यह मंच स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) से जुड़ी महिलाओं को डिजिटल माध्यम से उद्यम स्थापित करने, उनका प्रबंधन करने और उनकी प्रगति की निगरानी करने में सहायता प्रदान करेगा।
एसएचई-लीप्स क्या है?
एसएचई-लीप्स एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा विकसित किया गया है और इसका संचालन लोकओएस (LokOS) प्लेटफॉर्म के अंतर्गत किया जाएगा। यह मंच ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए एक समग्र डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराता है, जहां उद्यम की स्थापना, प्रबंधन, निगरानी और वास्तविक समय में प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
ग्रामीण उद्यम और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
यह प्लेटफॉर्म कृषि आधारित और गैर-कृषि आधारित दोनों प्रकार के ग्रामीण उद्यमों को कवर करेगा। इसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार सृजन, उद्यम विकास और वित्तीय समावेशन के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों को ग्रामीण उद्यमिता से संबंधित आंकड़ों के प्रबंधन और प्रत्येक उद्यम की प्रगति पर प्रभावी निगरानी करने में भी सहायता मिलेगी।
लखपति दीदी मिशन से जुड़ाव
एसएचई-लीप्स को लखपति दीदी मिशन से भी जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। इस मिशन के तहत लाभार्थी महिलाओं की संख्या का लक्ष्य तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अगले पांच वर्षों में इस मिशन के लिए 10 लाख करोड़ रुपये जारी करने की योजना बनाई गई है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, वित्तीय सशक्तिकरण और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पूरे देश में होगा क्रियान्वयन
एसएचई-लीप्स को देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह मंच राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों को स्वयं सहायता समूहों से जुड़े उद्यमों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने और उद्यम विकास की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहयोग देगा। इससे नीति निर्माण, निगरानी और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups) ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण आधार हैं।
- डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन भारत सरकार का एक संगठन है, जो डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के विकास से जुड़ा है।
- लोकओएस (LokOS) ग्रामीण आजीविका और स्वयं सहायता समूहों के प्रबंधन के लिए विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- लखपति दीदी पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
एसएचई-लीप्स ग्रामीण भारत में डिजिटल तकनीक और महिला उद्यमिता के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उद्यम स्थापित करने, उनकी प्रगति पर निगरानी रखने और वित्तीय अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।