उत्तर गुजरात के ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग

उत्तर गुजरात के ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग

भारत में भौगोलिक पहचान वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। उत्तर गुजरात के प्रसिद्ध ऊंझा जीरा (जीरा) और ऊंझा सौंफ (वरियाली) को भारत के भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री द्वारा भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। दोनों उत्पादों के प्रमाणपत्र 28 मार्च 2026 को जारी किए गए। इनका पंजीकरण मसालों की श्रेणी (क्लास 30) के अंतर्गत ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी), ऊंझा के नाम पर किया गया है। यह मान्यता इन मसालों की विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और क्षेत्रीय पहचान को कानूनी संरक्षण प्रदान करती है।

जीआई टैग क्या है?

भौगोलिक संकेत (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) ऐसा चिन्ह होता है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनकी विशेष गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशिष्ट विशेषताएं किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती हैं। भारत में जीआई पंजीकरण भौगोलिक संकेत वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है। इसका संचालन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अंतर्गत कार्यरत भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा किया जाता है। जीआई टैग मिलने से संबंधित उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलता है और उनकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहती है।

ऊंझा क्यों है मसालों का प्रमुख केंद्र?

उत्तर गुजरात का ऊंझा देश के प्रमुख कृषि बाजारों में से एक माना जाता है। यह विशेष रूप से जीरा और सौंफ के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। यहां की जलवायु, मिट्टी और कृषि परंपराएं इन मसालों को विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता प्रदान करती हैं। ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) दोनों उत्पादों की जीआई पंजीकृत स्वामी संस्था है। इससे इन उत्पादों की क्षेत्रीय पहचान को मजबूत आधार मिलेगा और नकली या गलत नाम से बिकने वाले उत्पादों पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

क्लास 30 का महत्व

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ का पंजीकरण नाइस वर्गीकरण की क्लास 30 के अंतर्गत किया गया है। इस श्रेणी में मसाले, चाय, कॉफी, आटा, अनाज तथा अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। भारत में जीआई पंजीकरण कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, विनिर्मित वस्तुओं और खाद्य उत्पादों सहित विभिन्न श्रेणियों में किया जा सकता है। ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को जीआई टैग मिलने से ये दोनों मसाले क्षेत्र-विशिष्ट संरक्षित कृषि उत्पादों की सूची में शामिल हो गए हैं।

निर्यात और ब्रांडिंग को मिलेगा बढ़ावा

जीआई प्रमाणन का उपयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पाद की वास्तविक उत्पत्ति और गुणवत्ता को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है। इससे उत्पादों की ट्रेसबिलिटी बढ़ती है और क्षेत्र आधारित ब्रांडिंग को मजबूती मिलती है। गुजरात के अन्य जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों में गिर केसर आम, भालिया गेहूं और कच्छी खारेक पहले से शामिल हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर दार्जिलिंग चाय, अल्फांसो आम और नागपुर संतरा जैसे उत्पाद भी जीआई संरक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में जीआई पंजीकरण भौगोलिक संकेत वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है।
  • नाइस वर्गीकरण की क्लास 30 में मसाले, चाय, कॉफी और कई खाद्य उत्पाद शामिल होते हैं।
  • उत्तर गुजरात का ऊंझा जीरा और सौंफ के व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
  • गुजरात के प्रमुख जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों में गिर केसर आम, भालिया गेहूं और कच्छी खारेक शामिल हैं।

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को जीआई टैग मिलना न केवल उत्तर गुजरात के किसानों और व्यापारियों के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह भारतीय मसालों की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करेगा। इससे इन उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को कानूनी संरक्षण के साथ नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर प्राप्त होगा।

Originally written on July 14, 2026 and last modified on July 14, 2026.

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