उत्तराखंड बना भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

उत्तराखंड बना भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

8 जुलाई 2026 को उत्तराखंड को आधिकारिक रूप से भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया। यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत हासिल की गई है। इस घोषणा के साथ उत्तराखंड ने वयस्क शिक्षा और आजीवन सीखने को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। राज्य की इस सफलता को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

पूर्ण साक्षर राज्य बनने का मानदंड

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार किसी भी राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के लिए 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में कम से कम 95 प्रतिशत वयस्क साक्षरता दर होना आवश्यक है। यह मानदंड स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है। उत्तराखंड ने इस निर्धारित सीमा को पार करते हुए पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त किया।

उत्तराखंड की साक्षरता में उल्लेखनीय प्रगति

वर्ष 2026 में उत्तराखंड की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई, जबकि 2025 में यह लगभग 98.7 प्रतिशत बताई गई थी। उल्लेखनीय बात यह है कि 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी, जो मात्र दो वर्षों में लगभग 14.9 प्रतिशत अंकों की वृद्धि के साथ नई ऊंचाई पर पहुंच गई। यह उपलब्धि सरकार, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।

प्रशासनिक प्रक्रिया और स्वीकृति

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 19 जून 2026 को राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने इस घोषणा को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही उत्तराखंड आधिकारिक रूप से भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उल्लास कार्यक्रम की भूमिका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में वयस्क शिक्षा और आजीवन सीखने को विशेष महत्व दिया गया है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए उल्लास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका पूरा नाम “Understanding Lifelong Learning for All in Society” है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वयस्क को निरंतर सीखने और ज्ञान से जोड़ना भी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य मिजोरम बना था।
  • उत्तराखंड से पहले गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जा चुका है।
  • किसी राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के लिए 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में कम से कम 95 प्रतिशत वयस्क साक्षरता आवश्यक होती है।
  • भारत में सामान्य साक्षरता का आकलन सात वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के आधार पर किया जाता है, जबकि वयस्क साक्षरता 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए मापी जाती है।

उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि प्रभावी नीतियों, जनभागीदारी और सतत प्रयासों के माध्यम से शिक्षा का दायरा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। आने वाले समय में यह उपलब्धि अन्य राज्यों को भी वयस्क शिक्षा और आजीवन सीखने की दिशा में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

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