गुजरात ने पहली डेटा सेंटर नीति 2026-29 लॉन्च की

गुजरात ने पहली डेटा सेंटर नीति 2026-29 लॉन्च की

गुजरात सरकार ने 9 जुलाई 2026 को गांधीनगर में अपनी पहली डेटा सेंटर नीति 2026-29 लॉन्च की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा जारी इस नीति का उद्देश्य राज्य को देश के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने और 7.5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नीति हाइपरस्केल डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डिजिटल सेवाओं के विकास को बढ़ावा देगी।

नीति के प्रमुख उद्देश्य

डेटा सेंटर नीति 2026-29 का मुख्य उद्देश्य गुजरात को डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है। नीति के तहत डेटा सेंटर की स्थापना, परियोजना अनुमोदन, बिजली और जल आपूर्ति जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है। इसके क्रियान्वयन और सभी आवश्यक मंजूरियों के लिए राज्य का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

निवेशकों को मिलेंगी आकर्षक सुविधाएं

इस नीति के अंतर्गत पात्र डेटा सेंटर परियोजनाओं को कई वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। सरकार पूंजी सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी तथा 20 वर्षों तक प्रति यूनिट 1 रुपये की बिजली शुल्क सब्सिडी प्रदान करेगी। इसके अलावा 20 वर्षों तक राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) और बिजली शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, स्टांप शुल्क में छूट तथा समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों (डिसेलिनेशन प्लांट) के लिए सहायता भी दी जाएगी। गैर-वित्तीय प्रोत्साहनों में तेज मंजूरी प्रक्रिया, अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई), भवन निर्माण नियमों में रियायत, बिजली की ओपन एक्सेस सुविधा तथा निर्बाध बिजली और जल आपूर्ति शामिल हैं।

हरित ऊर्जा और आधुनिक अवसंरचना पर जोर

नीति के अनुसार सभी डेटा सेंटर संचालकों को अपनी कुल बिजली आवश्यकता का कम से कम 51 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल डिजिटल अवसंरचना को बढ़ावा मिलेगा। ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (एसआईआर) को हाइपरस्केल डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्थापित परियोजनाओं को पात्र निवेश पर अतिरिक्त 2.5 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही गुजरात में दो नए केबल लैंडिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है, जिनके माध्यम से समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को स्थलीय नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, जहां बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण किया जाता है। हाइपरस्केल डेटा सेंटर उच्च कंप्यूटिंग क्षमता और तेज विस्तार के लिए विकसित किए जाते हैं। गुजरात सरकार की यह नीति डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक तकनीकी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डेटा सेंटर वे आधुनिक केंद्र हैं, जहां डिजिटल डेटा का संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण किया जाता है।
  • हाइपरस्केल डेटा सेंटर अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
  • फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) किसी भूखंड पर अधिकतम अनुमत निर्मित क्षेत्र को निर्धारित करने वाला शहरी नियोजन मानक है।
  • केबल लैंडिंग स्टेशन वे तटीय केंद्र होते हैं, जहां समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलें स्थलीय नेटवर्क से जुड़ती हैं।

गुजरात की पहली डेटा सेंटर नीति 2026-29 राज्य को भारत के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। निवेश प्रोत्साहन, हरित ऊर्जा, आधुनिक कनेक्टिविटी और अनुकूल नीतिगत ढांचे के माध्यम से यह नीति राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी विकास को नई गति प्रदान करेगी।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

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