त्रिपुरा के सभी स्कूलों में वंदे मातरम् और जन गण मन का पूर्ण संस्करण हुआ अनिवार्य

त्रिपुरा के सभी स्कूलों में वंदे मातरम् और जन गण मन का पूर्ण संस्करण हुआ अनिवार्य

राष्ट्रीय मूल्यों और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से त्रिपुरा सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ का पूर्ण संस्करण अनिवार्य कर दिया है। 7 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश के अनुसार यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों, निजी स्कूलों तथा मान्यता प्राप्त मदरसों पर समान रूप से लागू होगी। इस निर्णय का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

स्कूलों में नई प्रार्थना सभा व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत त्रिपुरा के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत पहले वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन से होगी। इसके बाद जन गण मन का पूर्ण संस्करण गाया जाएगा। आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान के गायन या वादन के दौरान सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा विद्यालय के कर्मचारियों को सावधान की मुद्रा में खड़े होकर सम्मान प्रकट करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था सभी प्रकार के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में लागू की जाएगी।

प्रशासनिक और कानूनी आधार

यह निर्देश त्रिपुरा के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया है। इसे गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय गीत के सम्मान, प्रस्तुति और प्रोटोकॉल से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है। इस नीति को त्रिपुरा मंत्रिपरिषद ने 25 जून 2026 की बैठक में मंजूरी दी थी और इसे 3 जुलाई 2026 से प्रभावी कर दिया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी विद्यालयों में इसके पालन को अनिवार्य बनाने के निर्देश जारी किए।

राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान का महत्व

वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गान है, जिसे संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया था। दोनों ही राष्ट्रीय प्रतीक भारतीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं। भारत में इनके सम्मान और प्रस्तुति से संबंधित नियम संवैधानिक, वैधानिक और कार्यपालिका द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निर्धारित किए गए हैं।

विद्यार्थियों में बढ़ेगी राष्ट्रीय चेतना

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान का नियमित एवं सम्मानपूर्वक गायन विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। साथ ही, इससे नई पीढ़ी को भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और उनके सम्मान से जुड़े नियमों की बेहतर समझ भी विकसित होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल है।
  • जन गण मन के रचयिता रवीन्द्रनाथ ठाकुर हैं।
  • भारत का राष्ट्रीय गान 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया गया था।
  • भारत में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनके प्रोटोकॉल से संबंधित नियम संवैधानिक, वैधानिक और कार्यपालिका के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संचालित होते हैं।

त्रिपुरा सरकार का यह निर्णय विद्यालयों में राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान का नियमित एवं सम्मानपूर्वक गायन विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Originally written on July 8, 2026 and last modified on July 8, 2026.

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